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PM मोदी का MANAV विजन क्या है, AI की तुलना न्यूक्लियर पावर से क्यों की? दिल्ली समिट से दुनिया को बड़ा मैसेज

India AI Summit 2026: इंडिया AI समिट-2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत दुनिया भर के कई राष्ट्राध्यक्ष और टेक दिग्गज शामिल हुए. गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने इस मौके पर कहा कि भारत में हो रहे बदलाव से वे अचंभित हैं. वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने मुंबई के एक वेंडर का उदाहरण देते हुए भारत में हुए डिजिटल रिवोल्यूशन के बारे में बताया.
India AI Summit 2026: देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भारत का ‘MANAV’ विजन प्रस्तुत किया, जो 21वीं सदी की तकनीक को मानव कल्याण से जोड़ने की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण माना जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत AI को ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत के साथ आगे बढ़ाना चाहता है, जहां तकनीक का उद्देश्य सभी के कल्याण और खुशहाली को सुनिश्चित करना हो. समिट को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि AI के विकास में इंसान को केवल डेटा पॉइंट या कच्चे संसाधन तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. इसके लिए AI को लोकतांत्रिक बनाना आवश्यक है, ताकि यह तकनीक समावेशन और सशक्तीकरण का माध्यम बने, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए. उन्होंने कहा कि आज AI को जिस दिशा में ले जाया जाएगा, वही भविष्य की दिशा तय करेगा.
प्रधानमंत्री ने MANAV विजन की व्याख्या करते हुए बताया कि M का अर्थ है मोरल एंड एथिकल सिस्टम्स, यानी एआई का विकास नैतिक मूल्यों और स्पष्ट दिशानिर्देशों पर आधारित होना चाहिए. A का अर्थ अकाउंटेबल गवर्नेंस है, जिसमें पारदर्शी नियम, मजबूत निगरानी व्यवस्था और राष्ट्रीय संप्रभुता सुनिश्चित हो. उन्होंने कहा कि ‘जिसका डेटा, उसका अधिकार’ के सिद्धांत को AI विकास का आधार बनाया जाना चाहिए. कुल मिलाकर MANAV Vision का मतलब मोरल एंड इथिकल सिस्टम्स, अकाउंटेबल गवर्नेंस और नेशनल सॉवरेंटी है. उन्होंने आगे कहा कि एआई किसी एक संस्था या देश के लिए एकाधिकार का साधन नहीं, बल्कि विकास का वाहक बनना चाहिए. एआई सिस्टम्स को वैलिड, सिक्योर और वेरिफाइड होने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दृष्टिकोण मानवता के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा.
रोजगार पर क्या प्रभाव?
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के रोजगार पर प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे इंटरनेट के शुरुआती दौर में इसके प्रभाव का अनुमान लगाना कठिन था, उसी तरह एआई भी भविष्य में नए रोजगार और अवसरों के द्वार खोलेगा. उन्होंने कहा कि भविष्य का कार्यक्षेत्र इंसानों और बुद्धिमान मशीनों के सहयोग का युग होगा, जहां बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी. सुरक्षा को एआई विकास का प्रमुख आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ देश और कंपनियां एआई को रणनीतिक संपत्ति मानते हुए इसे गोपनीय तरीके से विकसित करना चाहते हैं, लेकिन भारत की सोच इससे अलग है. भारत मानता है कि एआई जैसी तकनीक तभी वैश्विक सहयोग का माध्यम बन सकती है, जब इसे साझा किया जाए और इसके कोड खुले हों. इससे दुनिया भर के युवा दिमाग इसे अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकेंगे.

एआई की न्यूक्लियर एनर्जी से तुलना
प्रधानमंत्री ने वैश्विक समुदाय से आह्वान किया कि एआई को वैश्विक सार्वजनिक हित का माध्यम बनाया जाए. उन्होंने कहा कि यदि सभी देश मिलकर आगे बढ़ें, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी मानवता की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है. MANAV विजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह दृष्टिकोण एआई के वैश्विक विकास में नई दिशा प्रदान कर सकता है और मानव केंद्रित तकनीकी भविष्य की आधारशिला रख सकता है. पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि एआई न्यूक्लियर एनर्जी की तरह ही एक ट्रांसफॉर्मेटिव पावर है. इसका पॉजिटिव यूज करना जरूरी है.




