‘PM मोदी की चुप्पी का परिणाम भुगत रहा देश’: चीन द्वारा अरुणाचल की जगहों के नाम बदलने पर कांग्रेस का बड़ा हमला

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नई दिल्ली

जयराम रमेश ने कहा कि ‘हाल ही में एक शीर्ष चीनी राजदूत ने दावा किया था कि भारत चीन सीमा पर स्थिति अब स्थिर है लेकिन चीन की आक्रामकता जारी है। अब उसने तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी किए हैं। इससे पहले 2017 और 2021 में भी ऐसा किया गया था।’

अरुणाचल प्रदेश की कई जगहों के नाम रखने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि चीन को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा क्लीन चिट दे दी गई है। चीन की कार्रवाई पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी कांग्रेस ने सवाल खड़े किए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि देश प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चीन को क्लीन चिट दिए जाने का परिणाम भुगत रहा है।

‘प्रधानमंत्री ने चीन को दी क्लीन चिट’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने ट्वीट में लिखा कि ‘तीसरी बार चीन ने हिमाकत की है कि वह अरुणाचल प्रदेश में हमारे इलाकों का नामकरण कर रहा है। 21 अप्रैल 2017 को छह जगहों, 30 दिसंबर 2021 को 15 जगहों और तीन अप्रैल 2023 को 11 जगहों के नाम रखे गए। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। गलवान घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जो चीन को क्लीन चिट दी, उसी का परिणाम देश भुगत रहा है।’

जयराम रमेश ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ‘हाल ही में एक शीर्ष चीनी राजदूत ने दावा किया था कि भारत चीन सीमा पर स्थिति अब स्थिर है लेकिन चीन की आक्रामकता जारी है। अब उसने तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी किए हैं। इससे पहले 2017 और 2021 में भी ऐसा किया गया था।’ जयराम रमेश ने कहा कि ‘पीएम मोदी की चीन को जून 2020 में दी गई क्लीन चिट और चीन की कार्रवाई पर पीएम की चुप्पी की कीमत देश चुका रहा है।’ जयराम रमेश ने कहा कि करीब तीन साल बाद चीन की सेना, भारतीय सैनिकों को रणनीतिक रूप से अहम देपसांग में पेट्रोलिंग नहीं करने दे रही है, जबकि पहले वहां पेट्रोलिंग होती थी। अब चीन अरुणाचल प्रदेश में यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है।

11 जगहों के बदले चीन ने नाम
चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों का नामकरण किया है। ये नाम तिब्बती, चीनी और पिनइन लिपि में रखे हैं। जिन जगहों के नाम रखे गए हैं, उनमें दो आवासीय क्षेत्र, पांच पर्वतीय क्षेत्र और दो नदियों के नाम शामिल हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने यह जानकारी दी है।