जज साहब मुझे मेरी मां से बचाइए…मारती है, गाली-गलौज करती है; 15 साल के किशोर की अर्जी पर एक्‍शन में हाईकोर्ट

गुजरात

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 मां को संतान का सबसे बड़ा रक्षक माना जाता है, लेकिन जननी ही जब अपने बेटे के लिए समस्‍या बन जाए तो उसका चर्चा के केंद्र में आना लाजिमी है. गुजरात में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां 15 साल के एक किशोर ने अपनी ही मां के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.

गुजरात में मां की कथित प्रताड़ना से परेशान 15 वर्षीय किशोर ने सुरक्षा और अपने दादा-दादी के साथ रहने की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. किशोर ने आरोप लगाया है कि उसकी मां पिछले कई महीनों से उसके साथ मारपीट करती है, उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है और अपमानित करती है. उसने अदालत से सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने और उसे मोरबी में रहने वाले अपने दादा-दादी के पास भेजने की मांग की है.

किशोर की दादी की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एमसी त्यागी ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और पुलिस को नोटिस जारी किया है. अदालत ने दोनों एजेंसियों से पूछा है कि किशोर की ओर से पहले की गई शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है. उन्हें 28 दिसंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है.
‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, अधिवक्ता रफीक लोखंडवाला के माध्यम से पिछले सप्ताह दाखिल याचिकाओं के अनुसार, किशोर के माता-पिता का वर्ष 2020 में तलाक हो गया था. इसके बाद उसकी मां को उसकी अभिरक्षा मिली थी. मां अहमदाबाद के सरखेज इलाके में रहती है, जबकि किशोर के पिता रोजगार के सिलसिले में अंगोला में रहते हैं. उसके दादा-दादी मोरबी में रहते हैं.
किशोर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उसकी मां उससे घर के काम करवाती है और जब वह घर में अकेला होता है तो बिजली बंद कर देती है. पिछले करीब तीन महीनों से उसके साथ लगातार मारपीट और दुर्व्यवहार किया जा रहा है. उसने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक बार उसकी मां ने उस पर चाकू से हमला भी किया था. इसके बाद उसने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया और बाद में सरखेज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई.
अदालत पहुंचने से पहले किशोर ने बाल कल्याण समिति से भी संपर्क किया था. उसने समिति से अपनी शिकायतों की जांच कराने और उसे मोरबी में अपने दादा-दादी के पास भेजने का अनुरोध किया था. हालांकि, याचिका में आरोप लगाया गया है कि समिति और पुलिस ने उसकी बात सुनकर बयान दर्ज करने के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. इसके बाद किशोर खुद मोरबी पहुंचा और अपनी दादी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं.
दोनों याचिकाओं में अधिकारियों पर किशोर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया है.
पहली याचिका में बाल कल्याण समिति को किशोर की 13 अक्टूबर की अर्जी और 21 अक्टूबर को दर्ज कराए गए बयान पर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई है. वहीं, दूसरी याचिका में बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत पुलिस को उसकी मां के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है. अब इस मामले में 28 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई पर अदालत की नजर रहेगी.