सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों की ओर से प्रदर्शनकारियों पर हमले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों से जिस संयम की उम्मीद की जाती है, वह खत्म होता दिख रहा है।
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा किया गया बल प्रयोग परेशान करने वाला और गंभीर चिंता का विषय है।न्यायमूर्ति भुइयां ने पूर्व सचिव (सुरक्षा) यशोवर्धन आजाद की लिखी किताब ‘पुलिसिंग द रिपब्लिक’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि कानून के शासन से चलने वाले सभ्य समाज में हिरासत में मौत शायद सबसे बुरे अपराधों में से एक है। किसी भी तरह की यातना, क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार अनुच्छेद 29 के तहत प्रतिबंधित है, चाहे वह जांच, पूछताछ या किसी अन्य स्थिति में हो। जब सरकार के अधिकारी कानून तोड़ने वाले बन जाते हैं, तो इससे अराजकता को बढ़ावा मिल सकता है। अगर सरकार के अधिकारी ही कानून तोड़ने लगें, तो इससे कानून के प्रति अनादर पैदा होगा और अराजकता को बढ़ावा मिलेगा। कोई भी सभ्य देश ऐसा होने नहीं दे सकता।
