सीजेपी बन रही देश की आवाज: कांग्रेस बोली- बदलाव लाना है तो एकजुट हों दल, असली लड़ाई हमें ही लड़नी होगी

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दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे सीजेपी आंदोलन पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पहली बार खुलकर बात की है। बुधवार को पीटाई से बात करते हुए रमेश ने कहा कि सीजेपी आंदोलन युवाओं की नाराजगी और निराशा को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना है, लेकिन किसी भी मुद्दे को स्थायी राजनीतिक बदलाव तक पहुंचाने का काम आखिरकार राजनीतिक दलों को ही करना होगा।

 

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन को युवाओं की नाराजगी का परिणाम बताया है। हालांकि उन्होंने इस दौरान साफ कहा कि केवल आंदोलनों के भरोसे लोकतंत्र नहीं चल सकता और किसी भी मुद्दे को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आखिरकार राजनीतिक दलों को ही उठानी पड़ती है।

आंदोलन ने युवाओं की भावनाओं का सामने लाया
एक इंटरव्यू में रमेश ने कहा कि सीजेपी को लेकर अलग-अलग तरह की बातें कही जा रही हैं। कुछ लोग इसे किसी ‘डीप स्टेट’ की देन बताते हैं तो कुछ इसे युवाओं के गुस्से का नतीजा मानते हैं। लेकिन इसकी सच्चाई चाहे जो भी हो, इस आंदोलन ने सोशल मीडिया पर बड़ी चर्चा बटोरी और युवाओं की भावनाओं को सामने लाने का काम किया। यह कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है।

‘युवाओं की लड़ाई राजनीतिक पार्टियों को लड़नी होगी’
आखिरकार लोकतंत्र में राजनीतिक दल और उनका संगठन ही अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए युवाओं की आवाज को आगे ले जाने का काम स्थापित राजनीतिक पार्टियों को करना होगा।’ रमेश ने कहा कि आंदोलनों की अपनी अहमियत होती है, लेकिन लोकतंत्र केवल आंदोलनों पर नहीं टिका रह सकता। उसे आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक प्रक्रिया और दलों की भूमिका जरूरी होती है।
कांग्रेस देशभर में चला रही अभियान 
नीट यूजी की दोबारा परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए रमेश ने कहा कि कांग्रेस देशभर में एक अभियान चला रही है। इसके तहत राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों से संवाद किया है और आगे प्रयागराज व पटना में भी कार्यक्रम होंगे। यह अभियान जुलाई के मध्य में दिल्ली में समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सिर्फ नीट या सीबीएसई की गड़बड़ियों की बात नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी समस्याओं को भी उठा रहे हैं। इनमें परीक्षाओं की विश्वसनीयता, शिक्षा में सरकारी निवेश और बढ़ती निजी करण की प्रवृत्ति शामिल है।

शिक्षा बजट से ज्यादा कोचिंग संस्थानों की फीस
रमेश ने बताया कि कोटा में राहुल गांधी ने एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि आज देश में परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कोचिंग संस्थानों पर जितना पैसा खर्च कर रहे हैं, वह केंद्र सरकार के शिक्षा बजट से भी अधिक है। यह शिक्षा व्यवस्था में गहरे असंतुलन और असमानता का संकेत है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर देश में कोचिंग सेंटरों की जरूरत इतनी ज्यादा क्यों पड़ रही है? मेडिकल शिक्षा इतनी महंगी क्यों हो गई है? और शिक्षा का लगातार निजीकरण क्यों हो रहा है? उनके मुताबिक, यही वे सवाल हैं जिन पर संसद और समाज दोनों में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। गौरतलब है कि पेपर लीक विवाद के बाद 20 लाख से ज्यादा छात्रों ने रविवार को नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा दी। इस मामले ने सरकार को घेरा और इसी के विरोध में सीजेपी आंदोलन भी चर्चा का केंद्र बन गया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी
इस बीच सीजीपी का धरना दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी है। आंदोलनकारी कथित NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी अभियान के तहत प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को ‘डायपर दान अभियान’ भी चलाया। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। शनिवार से शुरू हुए इस आंदोलन में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी और कई छात्र संगठन शामिल हैं।