‘चार्जशीट के दस्तावेजों तक आरोपी की पहुंच रोकी नहीं जा सकती’, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

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सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि किसी आरोपी को चार्जशीट में शामिल दस्तावेजों तक पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे उसके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अदालत ने सेवानिवृत्त मेजर जनरल वीके सिंह को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम से जुड़े मामले में कुछ गोपनीय दस्तावेजों की टाइप की हुई प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

नई दिल्ली

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी भी आरोपी को चार्जशीट का हिस्सा बनने वाले दस्तावेजों तक पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेजों को छिपाना आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

 

यह फैसला जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने सुनाया। पीठ ने सेवानिवृत्त मेजर जनरल वीके सिंह को कुछ अत्यधिक गोपनीय दस्तावेजों की टाइप की हुई प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मेजर जनरल वीके सिंह 1923 के आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत 2007 में दर्ज एक मामले में अभियोजन का सामना कर रहे हैं।