सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड पुलिस के एक कांस्टेबल की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए कहा कि पुलिस सेवा में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि पुलिस जैसी सार्वजनिक सेवा को किसी भी तरह से धोखाधड़ी का साधन नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने झारखंड पुलिस के एक कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए सख्त टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस बल में शामिल व्यक्ति से उच्चतम स्तर की ईमानदारी, अनुशासन और सत्यनिष्ठा की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी के जरिए नौकरी हासिल करना पूरी व्यवस्था की जड़ पर प्रहार है।
क्या कहा कोर्ट ने?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच में यदि पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत हों, तो उसे केवल औपचारिकताओं के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखना संस्थागत अनुशासन और जनता के विश्वास के लिए हानिकारक है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि यह मामला सिर्फ विभागीय गलती नहीं बल्कि गंभीर धोखाधड़ी से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में न केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई सही है, बल्कि आपराधिक जांच भी जरूरी है। कोर्ट ने साफ कहा कि फर्जी प्रमाण पत्र, पहचान छिपाना और दोहरी नौकरी जैसे मामलों से पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
आपराधिक कार्रवाई के भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता और अन्य कानूनों के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत ने बिहार और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिया है कि मामले की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
क्या है पूरा मामला?
झारखंड पुलिस में 2005 में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त रंजन कुमार पर आरोप था कि उसने फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर बिहार पुलिस में भी नौकरी हासिल की। जानकारी के अनुसार, रंजन कुमार को 20 दिसंबर 2007 से 23 दिसंबर 2007 तक छुट्टी दी गई थी, लेकिन वह ड्यूटी पर वापस नहीं लौटा। इसी दौरान उसने कथित तौर पर ‘संतोष कुमार’ के नाम से बिहार पुलिस में नौकरी हासिल कर ली। बाद में जांच में सामने आया कि रंजन कुमार और संतोष कुमार एक ही व्यक्ति हैं और उसने फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया था।
