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डील नहीं टूटी, खेल हुआ और खतरनाक! अमेरिका का ऑफर टेबल पर, अब ईरान की चाल बाकी

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत भले ही बिना समझौते खत्म हुई, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह टूटी नहीं है. अमेरिका का अंतिम प्रस्ताव अभी भी टेबल पर है और ईरान ने उस पर विचार के लिए समय मांगा है. दोनों देशों की तकनीकी टीमें बातचीत जारी रखे हुए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि कूटनीति का रास्ता अभी खुला हुआ है.
इस्लामाबाद
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई हाई-स्टेक बातचीत आखिरकार टूट गई है. जहां एक तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि 21 घंटे की बातचीत के बावजूद कोई समझौता नहीं हो पाया, वहीं अंदरखाने से आ रही जानकारी कुछ अलग तस्वीर पेश कर रही है. सूत्रों के मुताबिक यह बातचीत पूरी तरह टूटी नहीं है, बल्कि अब ‘पॉज एंड रिस्पॉन्स’ यानी इंतजार और जवाब के दौर में प्रवेश कर चुकी है. पाकिस्तान सरकार के करीबी सूत्रों ने बताया कि अमेरिका ने अपनी तरफ से ‘फाइनल और बेस्ट ऑफर’ ईरान के सामने रख दिया है और अब गेंद तेहरान के पाले में है. खास बात यह है कि अमेरिका ने अपने प्रस्ताव को वापस नहीं लिया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि बातचीत के रास्ते अभी भी खुले हुए हैं.
ईरान की तरफ से भी इस प्रस्ताव को लेकर कोई औपचारिक इनकार नहीं किया गया है. इसके बजाय ईरानी नेतृत्व ने इस ऑफर का गहराई से अध्ययन करने और आंतरिक स्तर पर विचार-विमर्श के लिए समय मांगा है. इससे यह संकेत मिलता है कि तेहरान बातचीत को खत्म करने के बजाय उसे परखने और समझने की कोशिश कर रहा है. हालांकि सार्वजनिक तौर पर माहौल अलग नजर आ रहा है. जेडी वेंस ने बातचीत खत्म होने के बाद कहा कि समझौता नहीं हो सका और इसके लिए ईरान जिम्मेदार है, क्योंकि उसने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने साफ किया कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल न कर सके और न ही ऐसी क्षमता विकसित करे.
ट्रंप के दामाद अभी भी इस्लामाबाद में मौजूद
दूसरी ओर, ईरानी मीडिया और अधिकारियों का कहना है कि समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि अमेरिका ने ‘अत्यधिक और अवास्तविक मांगें’ रखीं. इसके बावजूद तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रखने के संकेत दिए गए हैं. दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि ऊपर से भले ही बातचीत ठहरी हुई दिख रही हो, लेकिन अंदरखाने प्रक्रिया अभी भी जारी है. सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ सदस्य स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अभी भी इस्लामाबाद में मौजूद हैं और दोनों पक्षों की तकनीकी टीमें दस्तावेजों का आदान-प्रदान कर रही हैं.
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ईरान ने क्या डिमांड की हैं
पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रहा है और वह हर संभव कोशिश कर रहा है कि बातचीत पूरी तरह टूटने न पाए. दोनों देशों के पास भी बातचीत जारी रखने के मजबूत कारण हैं, खासकर इसलिए क्योंकि दो हफ्ते का सीजफायर अभी भी लागू है, जो कूटनीति के लिए जरूरी समय और स्पेस दे रहा है. बातचीत के केंद्र में सबसे बड़ा मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है, जहां से दुनिया की करीब 20 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है. अमेरिका चाहता है कि इस रास्ते से वैश्विक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित और स्वतंत्र हो, जबकि ईरान इस पर अपने नियंत्रण और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं को लेकर समझौता चाहता है. इसके अलावा ईरान अपने फ्रीज किए गए फंड्स को रिलीज करने और क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक सीजफायर की भी मांग कर रहा है.




