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कांग्रेस ने मोदी सरकार पर साधा निशाना,सलमान खुर्शीद बोले-कूटनीतिक विफलता से बढ़ी पाकिस्तान की साख

कांग्रेस ने पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्षविराम के दौरान पाकिस्तान की भूमिका पर गहरी नाराजगी जताई है। पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार की गलत विदेश नीति की वजह से भारत ने अपना प्रभाव खो दिया है, जिससे न केवल पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिली है, बल्कि भारत में महंगाई और ऊर्जा संकट भी बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

 

नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी संघर्षविराम ने भारत की आंतरिक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस शांति समझौते का स्वागत तो किया है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की उभरती भूमिका को लेकर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की कूटनीतिक गलतियों और पक्षपाती रवैये के कारण आज भारत इस महत्वपूर्ण चर्चा से बाहर है। वहीं, पाकिस्तान एक मुख्य मध्यस्थ के रूप में उभर कर सामने आया है।

पाकिस्तान को मिला दुनिया के सामने सुधरने का मौका- खुर्शीद
कांग्रेस ने कहा कि भारत हमेशा से पश्चिम एशिया में एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए बेहतर स्थिति में रहा है। लेकिन मोदी सरकार की चुप्पी ने पाकिस्तान को यह मौका दे दिया कि वह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेज सजा सके। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह भारत की कूटनीति के लिए एक बड़ा झटका है। वर्षों से हम पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब उसे अपनी छवि सुधारने का मौका मिल गया है। अब पाकिस्तान खुद को एक शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है, जो भारत की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।

 

‘भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर’
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विचारधारा आधारित विदेश नीति की वजह से आज देश को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण भारत में रसोई गैस, उर्वरक और अन्य जरूरी चीजों की किल्लत होने लगी है। इसके अलावा, वहां रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनकी नौकरियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष को भरोसे में लेना चाहिए और एक ‘राष्ट्रीय दृष्टिकोण’ अपनाना चाहिए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ऐतिहासिक साख को फिर से बहाल किया जा सके।

क्या है मामला?
हाल ही में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच दो हफ्ते के संघर्षविराम की घोषणा हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस समझौते की शुरुआती बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को चुना गया है। तीनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान में इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। अब देखना होगा कि पश्चिम एशिया में तनाव कब कम होता है।

 

 

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