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‘लोकतंत्र भूल जाओ’, बुर्किना फासो के मिलिट्री लीडर का नया फरमान, डेमोक्रेसी को बताया झूठा

बुर्किना फासो के सैन्य राष्ट्रपति इब्राहिम त्राओरे ने कहा कि लोकतंत्र उनके देश के लिए नहीं है. उन्होंने चुनाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था को खारिज कर दिया. देश पहले से ही हिंसा, विस्थापन और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप से जूझ रहा है. 2024 तक माना जा रहा था कि सैन्य शासन रहेगा, लेकिन उन्होंने इसे 2029 तक बढ़ा दिया. साथ ही अब लोकतंत्र खत्म करने की भी बात कह दी है.

 

अफ्रीकी देश बुर्किना फासो से एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. यहां के मिलिट्री राष्ट्रपति इब्राहिम त्राओरे (Ibrahim Traore) ने साफ-साफ कह दिया है कि लोकतंत्र उनके देश के लिए नहीं है और लोगों को इसे भूल जाना चाहिए. सरकारी टीवी चैनक को दिए इंटरव्यू में त्राओरे ने कहा, ‘हम चुनाव की बात भी नहीं कर रहे. लोगों को लोकतंत्र का सवाल ही भूल जाना चाहिए. सच्चाई यह है कि लोकतंत्र हमारे लिए नहीं है.’ सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने लोकतंत्र को ‘झूठा’ बताते हुए कहा कि इसके नाम पर बच्चों, महिलाओं और आम लोगों की जान ली जाती है.

तख्तापलट कर बने राष्ट्रपति

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब त्राओरे पहले ही विपक्ष को दबा चुके हैं. जनवरी में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों पर सीधा प्रतिबंध लगा दिया था. इब्राहिम त्राओरे 2022 में तख्तापलट के जरिए सत्ता में आए थे. खास बात यह है कि उन्होंने जिस सरकार को हटाया, वह खुद भी एक सैन्य सरकार थी, जो सिर्फ 9 महीने पहले सत्ता में आई थी. पहले योजना थी कि 2024 तक देश में लोकतंत्र लौटेगा, लेकिन बाद में उनकी सरकार ने अपना कार्यकाल बढ़ाकर 2029 तक कर दिया.

जमीन पर हालात बिगड़ते जा रहे

जहां एक तरफ त्राओरे लोकतंत्र को खारिज कर रहे हैं, वहीं देश के अंदर हालात बेहद खराब हैं. द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से चल रही जिहादी हिंसा में हजारों लोग मारे जा चुके हैं. लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. आखिरी आंकड़ों के मुताबिक करीब 21 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, जो देश की आबादी का बड़ा हिस्सा है. त्राओरे इनके ऊपर लगाम नहीं लगा सके हैं.

मानवाधिकार के मामले पर घिरे

 

ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के अनुसार 2023 के बाद से 1800 से ज्यादा नागरिक मारे जा चुके हैं. इनको मारने वालों में सेना, मिलिशिया और अल-कायदा से जुड़े संगठन शामिल हैं. रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार और उसके सहयोगी समूहों ने कुछ समुदायों के खिलाफ हिंसा की और लोगों को जबरन बेघर किया. हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और रिपोर्ट करने वाले संगठनों और मीडिया पर भी प्रतिबंध लगा दिया.
त्राओरे अफ्रीका में अपने एंटी-फ्रांस और एंटी-वेस्ट बयानों की वजह से कुछ जगहों पर लोकप्रिय भी हुए हैं. वे अक्सर पुराने क्रांतिकारी नेता थॉमस संकारा का जिक्र करते हैं, जो 1980 के दशक में देश के राष्ट्रपति थे. लेकिन आलोचकों का कहना है कि देश के अंदर असली समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं और लोकतंत्र खत्म करने का बयान इन समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश भी हो सकता है.

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