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प्रकाश आंबेडकर का दावा- एसआईआर के जरिए हटाए जा सकते हैं 2.9 करोड़ नाम; ECI पर लगाए गंभीर आरोप

देश के कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग की ओर से कराए गए इस कार्यक्रम का सबसे ज्यादा विरोध पश्चिम बंगाल में हुआ है। कई सियासी दलों के नेता एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुके हैं।

पुदुचेरी

 

वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के नेता प्रकाश आंबेडकर ने दावा किया कि महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लगभग 2.9 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। आंबेडकर का कहा कि इतने बड़े पैमाने पर नामों को हटाने की प्रक्रिया आगामी चुनावों के परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है।

 

प्रकाश आंबेडकर ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर कांग्रेस नेता राहुल गांधी किसी ऐसे वार्ड से प्रभावित परिवार को मीडिया के सामने लाते, जहां चुनाव आयोग ने एसआईआर के तहत गैर-मौजूदगी का दावा करते हुए वोट कम किए हों, तो सरकार की सच्चाई उजागर हो जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुनाव आयोग द्वारा की जा रही धोखाधड़ी को साबित करता।

 

प्रकाश आंबेडकर ने किया चौंकाने वाला दावा
एक सोशल मीडिया पोस्ट में भी आंबेडकर ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में अनियमितताओं से राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं को बाहर किया जा सकता है।

एसआईआर का क्या है उद्देश्य और इससे जुड़ा विवाद?
विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूचियों में विसंगतियों को दूर करना है, जिसमें डुप्लिकेट प्रविष्टियां और मृत व्यक्तियों के नाम शामिल होते हैं। यह प्रक्रिया मतदाता सूचियों को अद्यतन और त्रुटि मुक्त रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हालांकि, विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग चुनिंदा विचारधाराओं या समुदायों से संबंधित मतदाताओं को बाहर करने के लिए किया जा रहा है। आंबेडकर का दावा इसी चिंता को रेखांकित करता है।

 

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