लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: गुमशुदगी मामलों पर SOP बनाने का आदेश, जवाब न देने पर अवमानना की चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने गुमशुदगी और मानव तस्करी मामलों में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। कई राज्यों द्वारा जवाब न देने पर कोर्ट ने अवमानना की चेतावनी दी और राष्ट्रीय SOP बनाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि मामलों में तुरंत कार्रवाई जरूरी है और पुलिस को सक्रिय रहना होगा।
नई दिल्ली
देश में गुमशुदगी और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कई राज्यों और केंद्र सरकार की तरफ से जवाब नहीं देने पर नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि अगर जवाब नहीं दिया गया तो अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही कोर्ट ने पूरे देश के लिए एक समान नियम यानी SOP बनाने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कहा कि गुमशुदगी और तस्करी जैसे मामलों में देरी बहुत खतरनाक होती है। इसलिए पूरे देश में एक जैसा और तुरंत लागू होने वाला सिस्टम जरूरी है। कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया कि वे मिलकर ऐसा सिस्टम बनाएं, जिससे हर पुलिस स्टेशन स्तर पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
क्या राज्यों की लापरवाही पर कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों और केंद्र की तरफ से नोटिस मिलने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया। इसे गंभीर लापरवाही माना गया। कोर्ट ने हरियाणा, मिजोरम, केरल, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के डीजीपी को 16 अप्रैल तक खुद हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा।
क्या एसओपी बनाने का आदेश क्यों दिया गया?
कोर्ट ने कहा कि देशभर में गुमशुदगी के मामलों में अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं, जिससे कार्रवाई में देरी होती है। इसलिए एक राष्ट्रीय एसओपी जरूरी है। कोर्ट ने साफ किया कि उसे सिर्फ कागजी नियम नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा सिस्टम चाहिए जो तुरंत लागू हो सके और जमीन पर असर दिखाए।
क्या मानव तस्करी मामलों में क्या निर्देश दिए गए?
कोर्ट ने कहा कि मानव तस्करी, खासकर बच्चों के मामलों में समय सबसे अहम होता है। जैसे ही कोई शिकायत दर्ज हो, पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक व्यक्ति मिल नहीं जाता, तब तक केस को सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि जमीन पर भी सक्रिय रखा जाए।
क्या केंद्र और राज्यों को क्या करना होगा?
कोर्ट ने गृह मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे मिलकर एक महीने के अंदर ठोस सुझाव दें। इन सुझावों के आधार पर पूरे देश के लिए एक एसओपी तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी भी बनाई गई है, जिसमें विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हैं।
कोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गृह मंत्रालय को इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग देने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी, जहां प्रगति की समीक्षा की जाएगी।




