देश
‘तुम्हें वो भाई मानती थी’, हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी को नहीं दी जमानत, कहा- भरोसा तोड़ना भी अपराध है

दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 साल की पीड़िता से रेप के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया. साथ ही जस्टिस गिरीश कठपालिया की बैंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सिर्फ रेप का केस नहीं है बल्कि भरोसा टूटने का भी है और इसे गंभीर अपराध का मुख्य आधार माना.
दिल्ली
दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से रेप के एक आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया.कोर्ट ने इस दौरान के महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की, जिसमें जस्टिस गिरीश कठपालिया की बेंच ने जमानत रोकने के लिए सिर्फ रेप ही नहीं बल्कि रिश्ते में भरोसा टूटने को भी बड़ी वजह बताया.
दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर रोक लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ बलात्कार का मामला नहीं है बल्कि यह उस भरोसे के टूटने का भी केस है, जिसमें रेप पीड़िता आरोपी को अपना भाई मानती थी और उसके राखी बांधती थी. बता दें कि आरोपी पर 13 साल की लड़की के साथ बलात्कार का आरोप है.
24 मार्च के अपने आदेश में जस्टिस गिरीश कठपालिया की बेंच ने कहा, ‘एफआईआर में पीड़िता ने पूरी घटना विस्तार से बताई है.उसने यह भी बताया कि उसने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसे काबू कर लिया और कपड़े से उसका मुंह बंद कर दिया. यह सिर्फ बलात्कार का मामला नहीं है. पीड़िता आरोपी को अपना भाई मानती थी और उसे राखी बांधती थी, यानी उस पर भरोसा करती थी.’
कोर्ट ने आगे कहा, ‘इन परिस्थितियों को देखते हुए मुझे जमानत देना उचित नहीं लगता, इसलिए आवेदन खारिज किया जाता है.’
बता दें कि यह मामला साल 2021 का है, जब 13 साल की एक नाबालिग ने आरोप लगाया कि आरोपी उसे बहाने से होटल ले गया, जहां उसके साथ बलात्कार किया. जबकि पीड़िता उसे भाई कहती थी और उस पर भरोसा करती थी. उसी साल रेप का केस दर्ज होने के बाद से आरोपी कैद में था और उसने अभी मार्च 2026 में जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
आरोपी के वकील विवेक त्रिपाठी ने कहा कि जमानत का एकमात्र आधार यह था कि आरोपी पिछले साढ़े चार साल से हिरासत में है. वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सभरवाल ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत का विरोध किया.
उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट में पीड़िता की गवाही पूरी तरह से अभियोजन के पक्ष में है और अब केवल दो औपचारिक गवाहों की जांच बाकी है.




