पश्चिम एशिया में संघर्ष से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर; कपिल सिब्बल ने जताई गंभीर चिंता

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर चुप्पी न साधने और सक्रिय कदम उठाने का आग्रह किया है।
नई दिल्ली
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के मद्देनजर। उन्होंने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र पूरी तरह ऊर्जा पर निर्भर है, जिसका एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। सिब्बल के अनुसार, ईरान जैसे देशों द्वारा खाड़ी क्षेत्र में पेट्रोलियम और गैस संसाधनों पर की जाने वाली जवाबी कार्रवाई भारत की अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकती है, क्योंकि हम वहां से आने वाली गैस, एलपीजी और कच्चे तेल पर बहुत अधिक निर्भर हैं। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर चुप्पी न साधने और सक्रिय कदम उठाने का आग्रह किया है।
भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। कई रिपोर्टों के अनुसार, देश अपनी कुल कच्चा तेल आवश्यकता का लगभग 85% आयात करता है, और यह आयात होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील मार्गों से होता है। यह निर्भरता भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे एलपीजी और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया संघर्ष का प्रभाव
पश्चिम एशिया में जारी युद्धों का सीधा असर भारत के गैस पर निर्भर उद्योगों और बंदरगाह आधारित व्यापार पर भी पड़ रहा है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सीईओ और महासचिव रंजीत मेहता ने चिंता व्यक्त की है कि यह युद्ध भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है, जिससे बंदरगाहों पर अफरा-तफरी का माहौल है और गैस आपूर्ति पर निर्भर व्यवसायों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
आयात बिल और ऊर्जा सुरक्षा
इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने जैसे कदम आयात पर निर्भरता कम करने और आयात बिल में कमी लाने में सहायक हो सकते हैं। यह देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का विमानन, ऑटोमोटिव, पेंट, टायर, सीमेंट, रसायन, सिंथेटिक कपड़ा और लचीली पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
घरेलू समाधान की ओर बढ़ता कदम
इस वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, भारत की ऊर्जा रणनीति को स्थानीय संसाधनों की ओर मोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) जैसे स्वदेशी समाधान ऊर्जा संकट के लिए एक प्रभावी और व्यावहारिक विकल्प प्रदान कर सकते हैं। ये न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हैं, बल्कि प्रदूषण कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक हो सकते हैं।




