देश
‘कोई मुझ पर आरोप लगा सकता है’ प्रशांत भूषण दे रहे थे दलील तभी CJI सूर्यकांत ने ऐसा क्यों कहा?

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने खुद को अलग कर लिया. उन्होंने कहा कि कोई मुझ पर आरोप लगा सकता है. इस दौरान प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए क्या कहा…
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान एक अहम मोड़ तब आया, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करने का फैसला किया. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि क्या मुझे इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए? कोई मुझ पर आरोप लगा सकता है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023 को चुनौती दी गई है. इस कानून में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक चयन समिति बनाई गई है, जिसमें प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं. विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि इस समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखा गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में अपने फैसले में CJI को चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की बात कही थी.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम 2023 को चुनौती दी गई है. इस कानून में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक चयन समिति बनाई गई है, जिसमें प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं. विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि इस समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखा गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में अपने फैसले में CJI को चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की बात कही थी.
CJI ने खुद को क्यों किया अलग?
जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तब सीजेआई सूर्यकांत ने खुद ही यह सवाल उठाया कि क्या उन्हें इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके मौजूदा पद और याचिका में उठाए गए मुद्दों के बीच ‘हितों का टकराव’ हो सकता है. यहां ‘हितों का टकराव’ इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सीधे उस संस्था (सीजेआई) से जुड़ा है, जिसका वे वर्तमान में नेतृत्व कर रहे हैं. यदि वे इस पर फैसला सुनाते हैं तो यह सवाल उठ सकता था कि वे अपने ही पद से जुड़े मुद्दे पर निष्पक्ष रह पाएंगे या नहीं.
जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तब सीजेआई सूर्यकांत ने खुद ही यह सवाल उठाया कि क्या उन्हें इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके मौजूदा पद और याचिका में उठाए गए मुद्दों के बीच ‘हितों का टकराव’ हो सकता है. यहां ‘हितों का टकराव’ इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सीधे उस संस्था (सीजेआई) से जुड़ा है, जिसका वे वर्तमान में नेतृत्व कर रहे हैं. यदि वे इस पर फैसला सुनाते हैं तो यह सवाल उठ सकता था कि वे अपने ही पद से जुड़े मुद्दे पर निष्पक्ष रह पाएंगे या नहीं.
या थी प्रशांत भूषण की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पेश हुए. उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले को ऐसी बेंच के सामने रखा जाए, जिसमें कोई भी जज भविष्य में मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में न हो. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने सहमति जताई और कहा कि उनके मन में भी यही विचार था. उन्होंने यहां तक कहा कि उन्होंने इस बारे में पहले से ‘होमवर्क’ कर रखा था, ताकि किसी भी तरह के आरोप या विवाद से बचा जा सके.
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पेश हुए. उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले को ऐसी बेंच के सामने रखा जाए, जिसमें कोई भी जज भविष्य में मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में न हो. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने सहमति जताई और कहा कि उनके मन में भी यही विचार था. उन्होंने यहां तक कहा कि उन्होंने इस बारे में पहले से ‘होमवर्क’ कर रखा था, ताकि किसी भी तरह के आरोप या विवाद से बचा जा सके.




