दिल्ली

केजरीवाल और सिसोदिया शराब घोटाले में बरी हुए, अब वो क्या कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं

दिल्ली कोर्ट द्वारा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के शराब घोटाले में बरी किए जाने के बाद सियासी भूचाल तो आएगा ही लेकिन क्या दोनों आप नेता अब उन्हें जेल में डालने और केस में परेशान करने के मामले में चुनौती देने हुए कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.

दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के साथ पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को शराब घोटाले में बरी कर दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि सीबीआई की जांच में खामियां हैं. जांच एजेंसी की रिपोर्ट को पहली नजर से देखने पर कोई केस ही नहीं बनता. इस मामले में केजरीवाल को 177 दिन और सिसोदिया को 510 दिनों तक जेल में रखा गया था.

इस घोटाले में दोनों को जेल में डालने और बीजेपी के इसे मुद्दा बनाकर हमलावर होने से आम आदमी पार्टी पर गहरा असर पड़ा. पहली बार पद पर रहते हुए दिल्ली का कोई मुख्यमंत्री जेल गया. फिर इस मामले ने आम आदमी पार्टी की इतनी बदनामी की, उसे दिल्ली विधानसभा चुनावों में जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा.
अब जबकि राउज एवेन्यू कोर्ट की सीबीआई जांच पर सख्त टिप्पणियों के बाद केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया है तो क्या केजरीवाल और सिसोदिया कानून का सहारा लेते हुए सीबीआई, केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं. हालांकि सीबीआई ने दिल्ली कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जाने की बात कही है.

केजरीवाल और सिसोदिया के बरी होने का मतलब

 

कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया, क्योंकि जांच में कोई साजिश या आपराधिक इरादा साबित नहीं हुआ. ये फैसला CBI की जांच पर सवाल उठाता है, जो केंद्र के अधीन है. इसके बाद केजरीवाल और सिसोदिया और अन्य बरी लोग कानूनी तौर पर कार्रवाई कर सकते हैं. कानून उन्हें इसकी इजाजत देता है

कानूनी तौर पर अब वो कौन से कदम उठा सकते हैं

झूठे आरोप लगाने पर BJP और केंद्र की सरकारी एजेंसियों के खिलाफ मानहानि का मामला दायर कर सकते हैं. आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने पहले ही ईडी के खिलाफ ऐसा करने की बात कही थी.
अगर ये साबित हो जाए कि ये पूरा मामला राजनीतिक बदले के लिए था, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है. मुआवजे की मांग कर सकते हैं. वो कोर्ट में ये मामला भी दर्ज कर सकते हैं कि इन कार्रवाइयों से जेल में डालकर उनके करियर को प्रभावित किया गया है प्रतिष्ठ को आंच पहुंचाई गई. लिहाजा इन दोनों मामलों में हर्जाना का दावा किया जा सकता है.

क्या केंद्र के खिलाफ सीधा केस कर सकते हैं

ईडी और सीबीआई की कार्रवाइयों की वजह से केजरीवाल और सिसोदिया केंद्र के खिलाफ सीधा केस शायद नहीं कर सकते. ये इतना आसान नहीं होगा. हालांकि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में मालिशियस प्रॉसिक्यूशन की याचिका दायर हो सकती है. आप ने पहले भी ईडी पर राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप लगाए थे लेकिन आप ने इस बारे में कोई नया ऐलान नहीं किया है.

तो क्या होगी अब आप की कानूनी रणनीति

शराब घोटाले में बरी होने के बाद आप की कानूनी रणनीति मुख्य रूप से केंद्र सरकार, ईडी, सीबीआई और बीजेपी पर राजनीतिक दुरुपयोग आरोपों के लिए चुनौती होगी. लेकिन आप ने अभी इस पर कोई पत्ते नहीं खोले हैं कि वो क्या करेगी. हालांकि दिल्ली कोर्ट का फैसला AAP के लिए बड़ी जीत है, लेकिन ED का आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस अभी लंबित है. निश्चित तौर पर आम आदमी पार्टी अब आक्रामक कदम उठाने की तैयारी करेगी. आप ईडी के पीएमएलए केस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है.

इसका सियासी असर क्या होगा

ये आम आदमी पार्टी के लिए फायदेमंद होगा. वो जनता के बीच जाकर कह सकेगी कि जानबूझकर पार्टी नेताओं को इन केसों में फंसाकर उनके खिलाफ माहौल बनाया गया. वह अब चुनावों में इसका फायदा ले सकती है.
शराब घोटाले में बरी होने का फैसला आप को राजनीतिक रूप से लाभ तो देगा खासकर दिल्ली और पंजाब में. ये बीजेपी और केंद्र पर राजनीतिक बदला के आरोपों को मजबूत करता है. आप इसे लोकतंत्र की जीत बताकर अपनी छवि साफ करेगी. 2025 विधानसभा हार के बाद केजरीवाल की वापसी को बल मिलेगा.
पंजाब और गुजरात में आप का आधार मजबूत होगा, जहां पार्टी पहले ही वोट शेयर बढ़ा चुकी है. विपक्षी एकता में वापसी आसान होगी. विपक्षी दलों को हौसला मिलेगा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में चुनौती देने पर न्याय मिल सकता है.

क्या केजरी और सिसोदिया के खिलाफ और कोई मामला

हां, प्रवर्तन निदेशालय का मनी लॉन्ड्रिंग केस अभी कोर्ट में चल रहा है. ये केस चलता रहेगा.

क्या सीबीआई और ईडी की कार्यशैली पर सवाल उठेंगे

केजरीवाल और सिसोदिया के शराब घोटाले में बरी होने से CBI और ED की कार्यशैली पर सवाल उठेंगे, जो राजनीतिक दुरुपयोग के आरोपों को बल देगा. यह संदेश जाएगा कि बिना ठोस सबूतों के लंबी जांच विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का हथियार बन गई हैं.
कोर्ट ने CBI को फटकार लगाई कि बिना सबूत के आरोप क्यों लगाए, जो उनकी विश्वसनीयता को कमजोर करेगा. ईडी का मनी लांड्रिंग केस दबाव में आएगा, क्योंकि वो सीबीआई की इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट में दायर किया गया है. लिहाजा ये केस भी कमजोर पड़ सकता है.

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