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डोला सेन कौन हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की तरफ से जोरदार दलीलें रखीं, SIR पर घिरा चुनाव आयोग

सुप्रीम कोर्ट में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद डोला सेन की इस पूरी प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान लाखों योग्य मतदाताओं के नाम फाइनल वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में सुधार के लिए चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जोरदार बहस देखने को मिली. सुप्रीम कोर्ट में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद डोला सेन की इस पूरी प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान लाखों योग्य मतदाताओं के नाम फाइनल वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं. सेन ने दावा किया कि चुनाव आयोग की तरफ से नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर, वैधानिक अधिकार रखने वाले इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) के फैसलों को कथित तौर पर पलट रहे हैं, जो कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है.
डोला सेन ने यह भी कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर का काम केवल ईआरओऔर एईआरओ की मदद करना है, लेकिन वे ECINET पोर्टल के जरिये वोटर्स के केसों की ‘रीव्यू’ कर रहे हैं. यह सीधा-सीधा वैधानिक प्रक्रिया में दखल है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोर्ट ने तत्काल सख्त निर्देश नहीं दिए, तो 9 फरवरी को पारित सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा और लाखों मतदाताओं को गंभीर नुकसान झेलना पड़ सकता है.

डोला सेन ने कोर्ट को क्या बताया?

डोला सेन ने कोर्ट को बताया कि 9 से 11 फरवरी के बीच ही करीब 7 लाख से ज्यादा मतदाताओं के मामलों को माइक्रो-ऑब्जर्वरों ने ‘रीव्यू’ के लिए डाल दिया. इनमें से कई ऐसे मतदाता हैं, जो पहले ही वैधानिक अधिकारियों द्वारा जांच के बाद योग्य पाए जा चुके थे. सेन के मुताबिक, 13 ऐसे ठोस मामले सामने आए हैं, जिनमें ERO की तरफ से क्लीयर किए गए मतदाताओं को बाद में माइक्रो-ऑब्जर्वर ने दोबारा समीक्षा के लिए चिह्नित कर दिया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ECINET पोर्टल में तकनीकी बदलाव कर दिए गए, जिससे ERO और AERO के अधिकार सीमित हो गए. 18 फरवरी के बाद कथित तौर पर ऐसी स्थिति बना दी गई कि अगर कोई अधिकारी ऑब्जर्वर की आपत्ति से असहमत भी हो, तो वह मतदाता को सीधे अंतिम सूची में शामिल नहीं कर सकता. इससे पहले ही ‘पार्क्ड’ किए गए करीब 5 लाख मतदाताओं को दोबारा समीक्षा में डाल दिया गया, जिससे उनके नाम कटने का खतरा बढ़ गया.

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर गंभीर सवाल

डोला सेन ने ECINET पोर्टल को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने स्क्रीनशॉट के साथ दावा किया कि कई मामलों में पहले अपलोड किए गए दस्तावेज बाद में ‘ब्लर’ या गायब हो गए. इसके बाद माइक्रो-ऑब्जर्वर ने यह कहते हुए मतदाताओं को दोबारा जांच में डाल दिया कि जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, जबकि वे पहले मौजूद थे. सेन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विशेष रोल ऑब्जर्वरों के लॉगिन अलग-अलग स्थानों से इस्तेमाल किए गए, जबकि उन्हें किसी एक जगह पर तैनात किया गया था.

चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर संकट

पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होनी है और इसके तुरंत बाद विधानसभा चुनाव की घोषणा की संभावना है. ऐसे में अगर इस चरण पर मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे, तो उन्हें सुधार का मौका तक नहीं मिलेगा. यही वजह है कि TMC ने इसे ‘लोकतंत्र पर सीधा खतरा’ बताया है.

डोला सेन कौन हैं?

डोला सेन तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद हैं. वह लंबे समय से पार्टी के ट्रेड यूनियन विंग से जुड़ी रही हैं और ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती हैं. जमीनी राजनीति से लेकर संसद तक, डोला सेन को एक मुखर और आक्रामक नेता के तौर पर जाना जाता है, जो संगठन और संवैधानिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखती हैं.
सुप्रीम कोर्ट में SIR के खिलाफ याचिका दाखिल कर डोला सेन ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं. राजनीतिक हलकों में इसे ममता बनर्जी की ओर से एक मजबूत कानूनी और सियासी जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एक भी योग्य मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हो.

 

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