‘पुलिस-सत्ता गठजोड़ निंदनीय’;-MLC के खिलाफ हत्या का मामला 30 नवंबर तक निपटाएं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के एक चर्चित हत्या मामले में पुलिस-सत्ता गठजोड़ पर कड़ी टिप्पणी की है। वाईएसआरसीपी के एमएलसी अनंथा सत्य उदया भास्कर राव पर 2022 में अपने दलित ड्राइवर की हत्या का आरोप है। कोर्ट ने जांच 31 मार्च तक और ट्रायल 30 नवंबर तक पूरा करने का आदेश दिया है।
नई दिल्ली
आंध्र प्रदेश के चर्चित हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि पुलिस और सत्ता के बीच गठजोड़ दिखाई दे रहा है। अदालत ने वाईएसआरसीपी के एमएलसी अनंथा सत्य उदया भास्कर राव के खिलाफ चल रहे 2022 के हत्या केस का ट्रायल 30 नवंबर तक पूरा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामले में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समयसीमा में सुनवाई पूरी होनी चाहिए।
मामला क्या है?
अनंथा सत्य उदया भास्कर राव पर मई 2022 में अपने पूर्व ड्राइवर वीधी सुब्रमण्यम की हत्या का आरोप है। बताया गया कि पैसों के विवाद को लेकर यह वारदात काकीनाडा में हुई थी। मृतक दलित समुदाय से था। इस मामले में हत्या और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था। राव को गिरफ्तार भी किया गया था। यह मामला उस समय का है जब राज्य में वाईएसआरसीपी की सरकार थी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड देखने पर साफ लगता है कि राज्य पुलिस आरोपी के साथ ‘हॉबनॉबिंग’ कर रही थी। कोर्ट ने इसे सत्ता और पुलिस के बीच स्पष्ट गठजोड़ बताया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि जांच और ट्रायल में पारदर्शिता और तेजी जरूरी है।
पहले क्या हुआ था?
सितंबर 2022 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने राव की डिफॉल्ट बेल याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि चार्जशीट को केवल तकनीकी खामियों के कारण अधूरा नहीं कहा जा सकता। बाद में दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी और कहा था कि आरोपी को अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
अदालत के निर्देश क्या हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई किसी वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को सौंपी जाए, जो सप्ताह में कम से कम एक बार सुनवाई करे। राज्य पुलिस को 31 मार्च तक जांच पूरी करने का आदेश दिया गया है। ट्रायल कोर्ट को 18 अप्रैल 2026 तक आरोप तय करने को कहा गया है। अभियोजन पक्ष को 31 अगस्त तक गवाहों की जांच पूरी करनी होगी। आरोपी को बचाव पक्ष के साक्ष्य के लिए दो महीने दिए गए हैं। कोर्ट ने सभी अदालतों, यहां तक कि हाई कोर्ट को भी, ट्रायल रोकने वाला कोई आदेश पारित करने से रोक दिया है। जिला स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी भी तय की गई है।




