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‘किस तरह का कल्चर बना रहे हैं’, फ्रीबीज पर CJI सूर्यकांत को आया गुस्सा, सुप्रीम कोर्ट में किसे सुनाया?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव से पहले ‘फ्रीबीज’ पर तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि खैरात नहीं, बल्कि रोजगार देने पर फोकस होना चाहिए. फ्रीबीज यानी मुफ्त की योजनाओं पर तमिलनाडु सरकार से सीजेआई ने पूछा, ‘अगर आप फ्री खाना, फ्री बिजली, फ्री साइकिल देकर शुरुआत करते हैं… तो आप किस तरह का कल्चर बना रहे हैं.’

फ्रीबीज कल्चर पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर नाराजगी जाहिर की है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने तमिलनाडु सरकार को फ्रीबीज यानी मुफ्त की योजनाओं पर जमकर फटकार लगाई. फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि कई राज्य घाटे में हैं, फिर भी मुफ्त की रेवड़ियां बांट रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को चुनाव से पहले ‘फ्रीबीज़’ बांटने पर तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाते हुए दूसरे राज्यों को भी कड़ा संदेश दिया. सीजेआई यानी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तमिलनाडु सरकार से पूछा, ‘अगर आप फ्री खाना, फ्री बिजली, फ्री साइकिल देकर शुरुआत करते हैं… तो आप किस तरह का कल्चर बना रहे हैं.’

फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा, ‘हम पूरे भारत में किस तरह का कल्चर बना रहे हैं? यह समझ में आता है कि आप एक वेलफेयर सिस्टम के तहत उन लोगों को बिजली देना चाहते हैं, जो बिजली का चार्ज नहीं दे सकते. लेकिन जो दे सकते हैं और जो नहीं दे सकते, उनके बीच फर्क किए बिना अगर आप बांटना शुरू करते हैं… तो क्या यह एक तरह की तुष्टिकरण पॉलिसी नहीं होगी?’
क्या है फ्रीबीज वाला मामला?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट आज तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स 2024 के रूल 23 को चुनौती दी गई थी. इस याचिका पर सुनवाई के दौरान ही सीजेआई सूर्यकांत फ्रीबीज पर भड़क गए. उन्होंने तमिलनाडु के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी इस मामले में अच्छे से सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की उस याचिका पर आई, जिसमें सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया था, चाहे उपभोक्ता की आर्थिक स्थिति कुछ भी हो.
चलिए सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने क्या-क्या कहा?
  • सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले फ्रीबी कल्चर पर सख्त टिप्पणी की और कहा कि अब ऐसे नीतियों पर फिर से विचार करने का समय आ गया है, क्योंकि इससे देश का आर्थिक विकास रुक जाता है. तमिलनाडु सरकार द्वारा चुनाव से पहले ‘फ्रीबी’ बांटने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया, ‘आप किस तरह की संस्कृति विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं?’
  • सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा, ‘देश के ज्यादातर राज्य राजस्व की कमी से जूझ रहे हैं, फिर भी वे विकास को नजरअंदाज कर इस तरह की मुफ्त चीजें बांट रहे हैं.’
  • पीठ ने कहा कि इस तरह की मुफ्त चीजों की बांटने से देश का आर्थिक विकास प्रभावित होता है और राज्यों को सभी को मुफ्त भोजन, साइकिल, बिजली देने के बजाय रोजगार के अवसर खोलने चाहिए.
  • हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके सरकार के नेतृत्व वाली पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया है, जिसमें मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया है.
  • पीठ ने पूछा, “हम भारत में किस तरह की संस्कृति विकसित कर रहे हैं? यह समझ में आता है कि आप कल्याणकारी योजना के तहत उन लोगों को मुफ्त बिजली देना चाहते हैं जो बिजली का बिल चुकाने में असमर्थ हैं. लेकिन बिना यह फर्क किए कि कौन भुगतान कर सकता है और कौन नहीं, आप सबको बांटने लगते हैं. क्या यह तुष्टिकरण नीति नहीं है?’
  • पीठ ने पूछा कि बिजली दरें घोषित होने के बाद तमिलनाडु कंपनी ने अचानक मुफ्त बांटने का फैसला क्यों किया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘राज्यों को रोजगार के अवसर खोलने चाहिए. अगर आप सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली देने लगेंगे तो कौन काम करेगा और फिर काम करने की संस्कृति का क्या होगा?’
  • पीठ ने कहा कि राज्य विकास परियोजनाओं पर खर्च करने के बजाय दो काम करते हैं- वेतन देना और इस तरह की मुफ्त चीजें बांटना.

 

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