धर्म

क्या होता है होलाष्टक, ये क्यों खतरनाक, कितने दिन तक रहेगा असर? काशी के ज्योतिष से जानें

 रंगों का त्योहार होली कुछ ही दिन दूर है. होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है. ये 8 दिन शुभ नहीं माने जाते हैं, लेकिन होलाष्टक का असर पूरे भारत पर नहीं होता.इस बारे में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर सुभाष पांडेय से बात की. वे बताते हैं कि होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुल शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है. इसका समापन फाल्गुल पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ होता है. इस साल होलाष्टक की शुरुआत 23 फरवरी से हो रही है, जो 3 मार्च तक रहेगा.

वाराणसी.
 सनातन धर्म में रंगों के त्योहार होली का विशेष महत्त्व है. होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लगता है. होलाष्टक के आठ दिनों को शास्त्रों में शुभ नहीं माना जाता है, लेकिन होलाष्टक का असर पूरे भारत पर नहीं होता, बल्कि कुछ जगहों पर ही इसका असर पड़ता है. ज्योतिषशास्त्र के मुहूर्त चिंतामणि में इसके लिए एक श्लोक है. इस श्लोक में ही इसका पूरा रहस्य छिपा है. बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर ने इसका राज खोला है. प्रोफेसर सुभाष पांडेय बताते हैं कि कुछ विशेष क्षेत्रों में ही होलाष्टक का असर होता है. शास्त्रों में वर्णन है कि भारत के पश्चिम हिस्से में ही होलाष्टक लगता है. विपाशा नदी जिसे वर्तमान में व्यास नदी के नाम से जाना जाता है, इसके अलावा इरावती (रावी), सतलज और त्रिपुष्कर नदी के तटीय क्षेत्रों में इसका प्रभाव नहीं पड़ता है. यह सभी नदी पंजाब, गुजरात और अजमेर के आसपास के क्षेत्रों में हैं. इन इलाकों में ही होलाष्टक का दोष लगता है.

और कहां नहीं होता असर
होलाष्टक का असर उत्तर और पूर्वोत्तर भाग में बिल्कुल नहीं होता है. यानी होलाष्टक के दिनों में भी भारत के इन हिस्सों में मांगलिक कार्य हो सकते हैं. इसमें किसी तरह का कोई दोष नहीं है. यानी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, असम, बिहार सहित अन्य जगहों पर इन दिनों में भी मुहूर्त के हिसाब से शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नए बिजनेस की शुरुआत सहित अन्य काम कर सकते हैं.
कब होगा होलाष्टक
हिन्दू पंचांग के अनुसार, होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुल शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है और इसका समापन फाल्गुल पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ होता है. इस साल होलाष्टक की शुरुआत 23 फरवरी से हो रही है, जो 3 मार्च तक रहेगा. होलिका दहन 2 मार्च की मध्य रात्रि में होगा क्योंकि चंद्रग्रहण के कारण इस बार होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त 2 मार्च को ही मिल रहा है.
क्यों नहीं माना जाता अच्छा
होलाष्टक से जुड़ी कथा भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की बहन होलिका से जुड़ी है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक के इन आठ दिनों में ही प्रहलाद के पिता हिरणकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को अलग-अलग तरह की यातनाएं दी थीं. अंतिम दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने को कहा जिसमें होलिका तो जल गई लेकिन प्रहलाद को सुरक्षित बच गए. इसी कारण इन आठ दिनों को शास्त्रों में अच्छा नहीं माना जाता है.

 

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