देश

‘क्या स्पीकर से भी ज्यादा कोई ताकतवर? सदन की कार्यवाही पर पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने उठाए सवाल

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने संसद में स्पीकर की शक्तियों को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सदन चलाने का पूरा अधिकार स्पीकर के पास होना चाहिए और किसी बाहरी प्रभाव से यह कमजोर नहीं होना चाहिए। उन्होंने संसद की घटती बैठक अवधि पर भी चिंता जताई। आइए विस्तार से पूरी खबर को जानते हैं।

 

नई दिल्ली

 

संसद की कार्यवाही और स्पीकर की शक्तियों को लेकर पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पूर्व सभापति हामिद अंसारी ने बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि सदन चलाने का पूरा अधिकार स्पीकर या सभापति के पास होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि क्या कोई इतना ताकतवर हो सकता है जो स्पीकर की संवैधानिक ताकत को दबा दे। उनका यह बयान हाल की संसदीय घटनाओं के संदर्भ में आया है।

 

स्पीकर की ताकत पर क्या बोले अंसारी?
हामिद अंसारी ने कहा कि सदन के नियम साफ बताते हैं कि कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार स्पीकर या चेयरमैन के पास होता है। उन्होंने कहा कि पहले संसद की सुरक्षा भी लोकसभा और राज्यसभा के नियंत्रण में होती थी, लेकिन अब व्यवस्था बदली है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसी स्थिति बन रही है जहां स्पीकर की स्वतंत्र शक्ति पर बाहरी प्रभाव हावी हो सकता है।

लोकसभा स्पीकर के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
यह पूरा मामला लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के उस बयान के बाद चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री को एक दिन सदन में नहीं आने की सलाह दी थी। स्पीकर के मुताबिक उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंच सकते हैं और कोई अप्रिय घटना हो सकती है। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा और परंपरा बचाने के लिए यह कदम उठाया गया।

 

संसद की बैठकों के दिनों पर भी चिंता
अंसारी ने संसद की घटती बैठक अवधि पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले संसद साल में औसतन 90 से 100 दिन बैठती थी, लेकिन अब यह घटकर 50 से 60 दिन रह गई है। उनका कहना है कि इससे कानून बनाने और नीतियों पर चर्चा का समय आधा हो गया है। उन्होंने सवाल किया कि जब काम ज्यादा है तो बैठक के दिन कम क्यों हो रहे हैं।

उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे पर भी टिप्पणी
पूर्व उपराष्ट्रपति ने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पद बहुत बड़ा होता है और आम तौर पर इस्तीफा नहीं दिया जाता। इस्तीफा आमतौर पर तभी होता है जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति बनते हैं। उन्होंने कहा कि इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी उन्हें नहीं पता, लेकिन यह असामान्य घटना है। सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पहले कह चुके हैं कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा।

नई किताब में भी रखे अपने विचार
अंसारी ने अपनी नई किताब में भी भारतीय राजनीति की दिशा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने वैचारिक गिरावट की बात कही है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए संसदीय परंपराओं और नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। उनके ताजा बयान से संसद की स्वायत्तता और कार्यप्रणाली पर नई बहस शुरू हो गई है।

 

डोनेट करें - जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर क्राइम कैप न्यूज़ को डोनेट करें.
 
Show More

Related Articles

Back to top button