क्राइम

हवस का भूखा वह दरिंदा, जिसने पत्नी की दोस्त और नौकरानी की बेटी को भी नहीं छोड़ा, पुलिस के जाल में अब ऐसे फंसा

दिल्ली पुलिस ने हवस का भूखा एक ऐसे दरिंदा को गिरफ्तार किया है, जिसके कारनामे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. यह शख्स अपने पत्नी की दोस्त और नौकरानी की बेटी को भी हवस का शिकार बनाया. 12वीं पास यह शख्स कॉल सेंटर में काम करते-करते ऐसे-ऐसे कारनामे किए, जिसको सुनकर दिल्ली पुलिस के भी होश उड़ गए हैं. दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने अब इस खूंखार अपराधी को दबोचा है जो सजा मिलने के बाद भी अपनी घिनौनी हरकतों से बाज नहीं आया.

नई दिल्ली
 रिश्तों को कलंकित करने और कानून की आंखों में धूल झोंकने वाले एक शातिर यौन अपराधी को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आखिर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है. दिल्ली पुलिस की वेस्टर्न रेंज क्राइम ब्रांच की टीम ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो न केवल बलात्कार के मामले में 10 साल की सजा काट रहा था, बल्कि पैरोल पर बाहर आकर उसने एक और मासूम जिंदगी को तबाह करने की कोशिश की. आरोपी की पहचान 33 वर्षीय करण डोलतानी के रूप में हुई है, जो दिल्ली के मटियाला एक्सटेंशन का निवासी है. इसकी गिरफ्तारी से पुलिस ने दो गंभीर मामलों को सुलझाने का दावा किया है. लेकिन इसकी कहानी जानकर आप हैरान हो जाएंगे. कैसे यह शख्स कॉल सेंटर में काम करते-करते सहेली की दोस्त और अपने ही नौकरानी की बेटी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाया.

करण डोलतानी की अपराध यात्रा विश्वासघात की नींव पर टिकी है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2016 में करण ने अपने ही घर में काम करने वाली नौकरानी की बेटी के साथ बलात्कार किया था. इस मामले में बिंदापुर थाने में दर्ज की गई थी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने उसे दोषी पाया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. लेकिन, उसकी दरिंदगी यहीं नहीं रुकी. जेल में सजा काटने के दौरान उसने अपनी पत्नी की खराब सेहत का बहाना बनाया और अदालत से 28 दिनों की अंतरिम जमानत हासिल कर ली.

 

विश्वासघात और दरिंदगी की दास्तान

जमानत पर बाहर आते ही करण ने फिर से अपनी पुरानी आदतों को दोहराया. साल 2022 में, जब वह बेल पर बाहर था, उसने अपनी ही पत्नी की एक सहेली को अपना शिकार बनाया. उसने न केवल उसके साथ दुष्कर्म किया, बल्कि अप्राकृतिक कृत्य यौन संबध को भी अंजाम दिया. इस मामले में बिंदापुर थाने में एक और गंभीर मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमें POCSO एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं. इसके बाद करण फरार हो गया और पुलिस को चकमा देने लगा.
क्राइम ब्रांच का ऑपरेशन ट्रैप
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदोरा ने एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर गौतम मलिक कर रहे थे, जिसमें एसआई कुलदीप, एसआई रवि, हेड कांस्टेबल भंवर और कांस्टेबल मुकेश शामिल थे. टीम को विशेष रूप से इस सीरियल ऑफेंडर को ट्रैक करने का काम सौंपा गया था. पुलिस ने मैन्युअल इंटेलिजेंस और तकनीकी सर्विलांस का एक मजबूत जाल बुझाया. सर्विलांस के दौरान कांस्टेबल मुकेश को एक गुप्त सूचना मिली कि करण डोलतानी गुरुग्राम के घमरोज टोल प्लाजा के पास आने वाला है. इस सूचना को हेड कांस्टेबल भंवर ने तकनीकी डेटा के जरिए पुख्ता किया. एसीपी राजपाल डबास की देखरेख में टीम ने टोल प्लाजा के पास घेराबंदी की और जैसे ही आरोपी वहां पहुंचा, उसे दबोच लिया गया.
छताछ में पता चला कि करण डोलतानी केवल 12वीं पास है और पढ़ाई में मन न लगने के कारण उसने स्कूल छोड़ दिया था. अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले वह एक कॉल सेंटर में काम करता था. पुलिस के अनुसार करण एक अभ्यस्त अपराधी है, जो कमजोर और असहाय लड़कियों को अपना निशाना बनाता है. वह अक्सर उन लोगों का भरोसा तोड़ता था जो उसके सबसे करीब थे, जैसे उसकी नौकरानी या उसकी पत्नी की दोस्त. उसके काम करने का तरीका बेहद डरावना है. वह जानबूझकर उन लोगों को चुनता था जो अपनी सुरक्षा के लिए उस पर निर्भर थे या उसकी पहुंच में थे.
करण डोलतानी की गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के लिए एक बड़ी परिचालन सफलता है. क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अपराधियों का समाज में खुला घूमना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है. उसने न केवल अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया, बल्कि कानून की प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न की. इस गिरफ्तारी के बाद अब उसे दोबारा जेल भेजा जा रहा है, जहां उसे अपनी पिछली सजा के साथ-साथ नए मामलों के लिए भी कठोर कानूनी कार्यवाही का सामना करना होगा.

 

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