विदेश

’10, 12,15 साल की बच्चियों की शादी कराऊंगा’, बगावती हुए पाकिस्तानी मौलाना, बाल-विवाह कानून पर भड़के

दुनिया चांद और मंगल पर पहुंच रही है और हमारा पड़ोसी देश अब तक यही तय नहीं कर पा रहा कि महिलाओं पर अत्याचार सही है या गलत. पाकिस्तान में जब बाल विवाह के खिलाफ कानून पास हुआ, तो वहां की संसद में मौलाना साहब ने खड़े होकर ऐलान कर दिया कि ये इस्लाम के खिलाफ है.

पाकिस्तान में कट्टरपंथ और कानून के टकराव को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस बार यहां बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी आजादी से ऊपर शादी को रखा जा रहा है. पाकिस्तान के बाल-विवाह कानून को लेकर यहां हंगामा मचा हुआ है. देश के प्रमुख धार्मिक नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने हाल ही में पारित और प्रस्तावित पारिवारिक कानूनों को खुलेआम चुनौती दी है. इनमें चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट बिल 2025 और घरेलू हिंसा अधिनियम 2026 शामिल हैं.

नेशनल असेंबली में बोलते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने इन कानूनों को मानने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार जो बदलाव पारिवारिक कानूनों में कर रही है, वह उन्हें स्वीकार नहीं हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने उकसाने वाले अंदाज में यह भी कहा कि विरोध के तौर पर वह इन कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करेंगे, जिसे जो करना है वो कर ले.

बच्चों की शादियां कराऊंगा, कर लोग जो करना है

मौलाना फजलुर रहमान ने यहां तक कह दिया कि वह नाबालिग बच्चों की शादियों में न सिर्फ शामिल होंगे, बल्कि ऐसी शादियों को बढ़ावा भी देंगे. उन्होंने कहा कि वे 10, 12, 15 और 16 साल के बच्चों की शादी कराएंगे और इस तरह से बाल विवाह पर प्रस्तावित प्रतिबंध का विरोध दिखाएंगे. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली.

किस कानून पर भड़क गए मौलाना साहब?

  1. यह पूरा विवाद ऐसे वक्त में सामने आया है, जब संसद ने पीपीपी की सांसद शर्मीला फारूकी द्वारा पेश घरेलू हिंसा अधिनियम 2026 पारित किया. इस दौरान विपक्षी बेंचों, खासकर जेयूआई-एफ के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया. नया कानून घर के भीतर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक हिंसा को अपराध की श्रेणी में रखता है.
  2. इस कानून के तहत पत्नी को तलाक या दूसरी शादी की धमकी देना, उसकी मर्जी के बिना दूसरों के साथ रहने को मजबूर करना या महिलाओं, बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध माना गया है. इसके साथ ही कानून में 18 साल से कम उम्र के हर व्यक्ति को बच्चा माना गया है, जिससे इस्लामाबाद में शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय हो जाती है.

कानून को कुरान और इस्लाम के खिलाफ बताया

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