‘असली न्याय जिला अदालतों में’, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने युवा वकीलों से की ये खास अपील

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सच्चा न्याय जिला अदालतों में ही मिलता है, न कि केवल हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में। उन्होंने जिला अदालतों को लोअर कोर्ट कहने की सोच को गलत बताया और युवा वकीलों से वहां प्रैक्टिस करने की अपील की।
नई दिल्ली
भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने देश की जिला अदालतें और उसके फैसले को लेकर युवा वकीलों से एक बड़ी अपील की। उन्होंने कहा कि असली और सच्चा न्याय देश की जिला अदालतों में ही मिलता है। उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वे युवा वकीलों को जिला अदालतों में प्रैक्टिस करने के लिए प्रोत्साहित करें। सीजेआई ने कहा कि जिला अदालतों को लोअर कोर्ट कहना गलत है। उन्होंने साफ कहा कि ये अदालतें स्वतंत्र न्यायपालिका की सबसे अहम कड़ी हैं और आम लोगों के लिए न्याय का पहला दरवाजा यही होती हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आम नागरिक जब अपने अधिकारों के लिए अदालत जाता है, तो उसकी पहली मुलाकात जिला अदालत में ही होती है। अगर यहीं उसे सही और समय पर न्याय मिल जाए, तो उसे ऊपरी अदालतों में जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने जिला अदालतों की तुलना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से करते हुए कहा कि जैसे समय पर इलाज मिल जाए तो मरीज को बड़े अस्पताल नहीं जाना पड़ता, वैसे ही जिला अदालतों में न्याय मिल जाए तो मामला आगे नहीं बढ़ता।
कार्यक्रम में क्या-क्या बोले सीजेआई सूर्यकांत
बता दें कि सीजेआई सूर्यकांत यह बातें दिल्ली हाईकोर्ट परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में कह रहे थे। यह कार्यक्रम दिल्ली बार काउंसिल ने उन्हें भारत का 53वां मुख्य न्यायाधीश बनने पर सम्मानित करने के लिए आयोजित किया था। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, बार काउंसिल के अधिकारी और कई वकील मौजूद थे।
युवा वकीलों को खास संदेश
सीजेआई ने चिंता जताई कि आजकल कई कानून के छात्र और युवा वकील यह सोचते हैं कि उन्हें सिर्फ हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में ही प्रैक्टिस करनी चाहिए, जबकि जिला अदालतों को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने भी अपने करियर की शुरुआत जिला अदालत से की थी। उन
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अपील
सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे जिला अदालतों में प्रैक्टिस को सम्मान और प्रोत्साहन मिले। इससे देश की वकालत व्यवस्था और मजबूत होगी। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक ड्राफ्टिंग में मदद कर सकती है, लेकिन सही फैसला लेने के लिए सोचने और समझने की क्षमता सीखना जरूरी है, जो अनुभव से आती है।




