इतिहास, संस्कृति और धर्म से मोदीजी के शाशमे हो रहा खिलवाड़ ?

नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस तेजी से अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन राम मंदिर बनाने के लिए दे दी गई और फिर वहां राम मंदिर बन भी गया
नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस तेजी से अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन राम मंदिर बनाने के लिए दे दी गई और फिर वहां राम मंदिर बन भी गया, उससे भाजपा समर्थकों में यह विश्वास और पुख्ता हो गया कि मोदी के रहते हिंदू धर्म सुरक्षित रहेगा और हिंदू जागा रहेगा। हालांकि हिंदू कब सोया हुआ था और धर्म को कब खतरा था, इसका कोई तार्किक जवाब इन समर्थकों के पास नहीं है। क्यों धर्म खतरे में रहता तो देश में हिंदू आबादी बहुसंख्यक नहीं रहती। बहरहाल, भाजपा की धर्म की राजनीति में आम जनता की आस्था उलझ कर रह गई और अब जब धर्म का तरह-तरह से अपमान हो रहा है, तो यह उलझी हुई धार्मिक जनता समझ नहीं पा रही है कि उसे क्या करना चाहिए।
अभी तीन-चार तीन पहले नरेन्द्र मोदी शिवजी की तरह डमरू बजाते दिखे, इसके बाद पतंगबाजी का शौक पूरा करने के लिए हनुमानजी को ही पतंग की तरह इस्तेमाल किया। लेकिन हिंदू सोया रहा, उसे अपने आराध्य भगवानों के अपमान पर आपत्ति नहीं हुई। उत्तरप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने हनुमानजी के अपमान के विरोध में लखनऊ में हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहा, तो पुलिस ने उन्हें रोका। हालांकि पाठ फिर भी उन्होंने पूरा किया। लेकिन इसमें कोई हिंदुत्ववादी संगठन अजय राय का साथ देने आगे नहीं आया। जो लोग चर्च या मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, उन्हें इस बात से तकलीफ नहीं हुई कि मंदिर में किसी को हनुमान चालीसा का पाठ करने से क्यों रोका जा रहा है। धर्म को लेकर यह दोहरा रवैया जाहिर करता है कि भाजपा के लिए धर्म केवल राजनीति में सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया जाता है। आस्था पर पैर रखकर अपमानित करने से भाजपा नेताओं को कोई गुरेज नहीं है।
इसी तरह प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों का भी लगातार तिरस्कार भाजपा कर रही है। अभी सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण के हजार साल मनाए गए और नरेन्द्र मोदी ने इसमें कहा कि यह हमारी विजय का प्रतीक है, क्योंकि आक्रमण के बाद भी सोमनाथ को नष्ट नहीं किया जा सका। लेकिन खुद मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मंदिरों, मूर्तियों और घाटों को जीर्णोद्धार के नाम पर बर्बाद किया जा रहा है। इसमें मणिकर्णिका घाट को भी नहीं बख्शा गया, जो हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और सबसे पवित्र श्मशान घाटों में से एक है।
मोक्ष की कामना में श्रद्धालु यहां आते हैं, लेकिन शायद नरेन्द्र मोदी की नजर में श्रद्धा का कोई मोल नहीं है, उन्हें केवल मुनाफे की भाषा समझ आती है। तभी तो इस पवित्र माने जाने वाले घाट का अविचारित पुनरूद्धार किया जा रहा है। जिसमें पुराने घाटों और मूर्तियों पर बेरहमी से बुलडोजर चला दिया गया और जब इसका विरोध शुरु हुआ तो जिला प्रशासन का जवाब आया कि मूर्तियों को दोबारा लगाने के लिए सुरक्षित रखा गया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि दीवारों में लगी कुछ कलाकृतियां व मूर्तियां प्रभावित हुई हैं लेकिन उन्हें संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है और काम पूरा होने के बाद उन्हें उनके मूलरूप में फिर से स्थापित किया जाएगा। लेकिन सवाल यही है कि आखिर इस तरह के कामों में पहले से सावधानी क्यों नहीं बरती गई।
जब मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनवाया था, तब भी कई पुरानी मूर्तियां और छोटे मंदिरों को तोड़ा गया था। अब अहिल्याबाई होलकर की लगभग सौ साल पुरानी मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया है। जबकि इन्हीं देवी अहिल्याबाई होलकर ने मणिकर्णिका घाट का निर्माण करवाया था और कई मंदिरों का संरक्षण भी किया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी को घेरते हुए एक पोस्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की तरफ ध्यान दिलाया है और अहम सवाल पूछे हैं। उन्होंने लिखा कि ”गुप्त काल में वर्णित जिस मणिकर्णिका घाट का लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने पुनरुद्धार कराया था, उस दुर्लभ प्राचीन धरोहर को आपने पुनरुद्धार के बहाने तुड़वाने का अपराध किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने ”भोंडे सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर बनारस के मणिकर्णिका घाट में बुलडोजर चलवाकर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को ध्वस्त कराने” का काम किया है। आप चाहते हैं कि इतिहास की हर धरोहर को मिटाकर बस आपकी नामपट्टिका चिपका दी जाए।”
श्री खड़गे ने कहा कि पहले गलियारे के नाम पर छोटे-बड़े मंदिर और देवालय तोड़े गए और अब प्राचीन घाटों की बारी है। दुनिया का प्राचीनतम शहर काशी अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का ऐसा संगम है जो पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। क्या इस सब के पीछे फिर से व्यावसायिक मित्रों को फायदा पहुंचाने की मंशा है? जल, जंगल, पहाड़- सब आपने उनके हवाले किए हैं, अब सांस्कृतिक विरासत की बारी आ गई है।”
मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री से कहा कि, ”देश की जनता के आपसे दो सवाल हैं- 1. क्या जीर्णोद्धार, साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण का काम विरासत को सहेज नहीं हो सकता था? पूरे देश को याद है कि संसद परिसर से आपकी सरकार ने किस तरह से महात्मा गांधी एवं बाबासाहेब आंबेडकर समेत भारत की महान हस्तियों की प्रतिमाओं को बिना किसी विचार-विमर्श के एक कोने में रखवा दिया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि जलियांवाला बाग स्मारक की दीवारों से इतिहास से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को इसी पुनरुद्धार के नाम पर मिटाया गया। श्री खड़गे ने दूसरा सवाल करते हुए कहा, ”मणिकर्णिका घाट में बुलडोजर का शिकार बनी सैकड़ों साल पुरानी मूर्तियों पर कुल्हाड़ी चलाकर उन्हें मलबे में क्यों डाला गया, क्या उन्हें किसी संग्रहालय में संभाल कर नहीं रखा जा सकता था? उन्होंने कहा, ”आपने दावा किया था- ‘मां गंगा ने बुलाया है।’ आज आपने मां गंगा को भुला दिया है। बनारस के घाट बनारस की पहचान हैं। क्या आप इन घाटों को जनता की पहुंच से दूर करना चाहते हैं? लाखों लोग मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में हर वर्ष काशी आते हैं। क्या आपकी मंशा इन श्रद्धालुओं से विश्वासघात करने की है?”
नरेन्द्र मोदी श्री खड़गे के इन सवालों के जवाब नहीं देंगे, ये तय है। लेकिन जरूरी है कि उनसे लगातार ऐसे सवाल किए जाते रहें। क्योंकि यही हकीकत है कि जीर्णोद्धार के नाम पर व्यापारियों की जेब में तो लाखों करोड़ चले जाते हैं, अधिकारियों को उनका हिस्सा मिल जाता है। लेकिन देश की विरासत इसमें नष्ट होती जा रही है। याद कीजिए कुंभ मेले में भी लोगों की आस्था का ऐसा ही अपमान किया गया था, और ये सिलसिला बढ़ ही रहा है। अभी अहिल्याबाई की मूर्ति तोड़ने पर इंदौर के खासगी ट्रस्ट ने इसे राष्ट्रीय गौरव का अपमान बताया और प्रधानमंत्री मोदी से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। होलकर परिवार के वंशजों ने कहा कि विकास के नाम पर इतिहास और आस्था की बलि देना अक्षम्य है। जिसके बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई महाजन को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा। लेकिन ऐसा बचाव कब तक होगा, भाजपा को इतिहास, संस्कृति और धर्म से खिलवाड़ रोकना ही होगा।




