गुजरात

चुनाव से पहले गुजरात में बैकफुट पर आई भाजपा! एक सप्ताह में दो फैसले वापस लेने की तैयारी

गुजरात सरकार आवारा पशुओं को लेकर उस विधेयक को वापस ले सकती है, जिसमें शहरी इलाकों में पशुपालन के लिए लाइसेंस को जरूरी करार देने की बात थी। इस विधेयक का गुजरात मलधारी समुदाय ने विरोध किया था।

अहमदाबाद

गुजरात सरकार आवारा पशुओं को लेकर उस विधेयक को वापस ले सकती है, जिसमें शहरी इलाकों में पशुपालन के लिए लाइसेंस को जरूरी करार देने की बात थी। इस विधेयक का गुजरात मलधारी समुदाय ने विरोध किया था, जो आमतौर पर पशुपालन करते हैं। गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल ने कहा कि इस विधेयक को वापस भी लिया जा सकता है। इससे पहले 29 मार्च को पाटिल ने परी-तापी-नर्मदा इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट को भी वापस लेने की बात कही थी। इस प्रोजेक्ट का आदिवासी समुदायों की ओर से विरोध किया जा रहा था। उनका कहना था कि इसके चलते उन्हें अपनी जमीन खोनी पड़ सकती है। सीआर पाटिल के ऐलान के बाद विधानसभा में भी इस बारे में आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई थी।

इस तरह पाटिल ने एक ही सप्ताह में दो फैसलों को वापस लेने की बात कही है। माना जा रहा है कि भाजपा सरकार किसी भी समुदाय को नाराज नहीं करना चाहती है। इसी साल के अंत में राज्य में चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले वह किसी भी वर्ग के गुस्से का शिकार नहीं होना चाहती। पशुओं को लेकर प्रस्तावित विधेयक का कांग्रेस भी पुरजोर विरोध कर रही थी। सीआर पाटिल ने सोमवार को कहा, ‘मुझे लगता है कि गुजरात म्युनिसिपल ऐक्ट के तहत राज्य में आवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए काफी प्रावधान हैं। कुछ नेताओं ने इस संबंध में मुझे ज्ञापन दिया है और मैंने सीएम से इस मामले पर एक बार फिर विचार करने को कहा है। सीएम का रुख सकारात्मक था और मुझे लगता है कि सरकार इस पर दोबारा विचार करेगी।’

कांग्रेस ने तेज कर दिया था विरोध, बैकफुट पर आ गई भाजपा

बता दें कि 31 मार्च को प्रदेश सरकार ने गुजरात केटल कंट्रोल इन अर्बन एरियाज बिल पेश किया था। इस विधेयक को लेकर सरकार का कहना था कि इससे शहरी इलाकों में आवारा पशुओं की समस्या से निपटने में मदद मिल सकेगी। नए बिल के मुताबिक शहरी इलाकों में पशुपालन के लिए लोगों को लाइसेंस लेना होगा। नगर निगम के तहत आने वाले इलाकों में पशुओं को पालने के लिए रजिस्ट्रेशन और टैगिंग भी जरूरी है। यही नहीं इस नियम का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है। इस पर कांग्रेस की ओर से विरोध शुरू किया गया था। यही नहीं मलधारी समुदाय का भी इसे समर्थन मिल रहा था, जिससे भाजपा अब बैकफुट पर आती दिख रही है।

 

डोनेट करें - जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर क्राइम कैप न्यूज़ को डोनेट करें.
 
Show More

Related Articles

Back to top button