देश

‘वो आधुनिक गांधी हैं’ कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों चलवाया सोनम वांगचुक का वो ‘गुप्त’ वीडियो?

 सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को अवैध बताया. सिब्बल ने कोर्ट में वह वीडियो दिखाया जिसे पुलिस ने छिपाया था. इस वीडियो में वांगचुक हिंसा रोकने की अपील कर रहे थे. सिब्बल ने आरोप लगाया कि सबूतों को छिपाना और देरी करना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने वांगचुक की तुलना गांधी जी के सत्याग्रह से की. अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

 

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लद्दाख के दिग्गज सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर लंबी बहस हुई. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत कैद करना पूरी तरह गैरकानूनी है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रशासन ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका पर सुनवाई के दौरान कई तथ्यों को छिपाया. सिब्बल ने आरोप लगाया कि वांगचुक के शांतिपूर्ण संदेश वाले वीडियो को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया. उन्होंने कोर्ट रूम में वह वीडियो भी प्ले किया जिसमें वांगचुक हिंसा रोकने की अपील कर रहे थे. सिब्बल ने कहा कि यह गिरफ्तारी संविधान के आर्टिकल 22 का खुला उल्लंघन है. उन्होंने तर्क दिया कि जब किसी को हिरासत में लिया जाता है तो उसे सभी सबूत सौंपने होते हैं. लेकिन वांगचुक को वे वीडियो नहीं दिए गए जिन पर उनकी गिरफ्तारी टिकी थी. इस केस ने अब एक नया मोड़ ले लिया है.
क्या आर्टिकल 22 के उल्लंघन से सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी हो जाएगी रद्द?
कपिल सिब्बल ने कोर्ट के सामने संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा बहुत मजबूती से उठाया. उन्होंने बताया कि वांगचुक को हिरासत में लेने का आदेश 26 सितंबर 2025 को जारी हुआ था. पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में चार मुख्य वीडियो का जिक्र किया था. ये वीडियो 10, 11 और 24 सितंबर के बताए गए थे. सिब्बल ने दलील दी कि कानून के मुताबिक आरोपी को ये सभी वीडियो मिलने चाहिए थे. लेकिन वांगचुक को केवल डिटेंशन ऑर्डर थमाया गया और वीडियो नहीं दिए गए.
क्या पुलिस ने जानबूझकर वांगचुक के शांति संदेश वाले वीडियो को कोर्ट से छिपाया?
बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने एक सनसनीखेज खुलासा किया. उन्होंने बताया कि 24 सितंबर को लद्दाख में कुछ हिंसक घटनाएं हुई थीं. उन घटनाओं से सोनम वांगचुक बहुत दुखी थे. उन्होंने उसी समय भूख हड़ताल तोड़कर लोगों से शांति की अपील की थी. वांगचुक ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है.
सिब्बल ने कोर्ट में आरोप लगाया कि पुलिस ने इस शांति वाले वीडियो को सबूतों से हटा दिया. उन्होंने केवल उन वीडियो को आधार बनाया जिनसे वांगचुक को विलेन दिखाया जा सके.
सिब्बल ने कोर्ट की अनुमति से वह वीडियो जज के सामने चलाया. वीडियो में वांगचुक साफ तौर पर हिंसा का विरोध करते नजर आए. सिब्बल ने इसे ‘मैलिस’ यानी दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया है.
विषय प्रशासन का दावा कपिल सिब्बल की दलील
गिरफ्तारी का आधार वांगचुक के वीडियो हिंसा भड़का रहे थे. वीडियो में केवल शांति और सत्याग्रह की बात थी.
सबूतों की सप्लाई सभी जरूरी पेपर्स और लिंक दे दिए गए. 28 दिन की देरी हुई और पेन ड्राइव में वीडियो नहीं थे.
हिंसा का कनेक्शन 24 सितंबर की हिंसा के पीछे वांगचुक थे. वांगचुक ने उसी दिन हिंसा के खिलाफ भाषण दिया था.
कानूनी प्रक्रिया NSA के सभी नियमों का पालन हुआ. आर्टिकल 22 और प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन हुआ.
कपिल सिब्बल ने क्यों की सोनम वांगचुक की तुलना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से?
कपिल सिब्बल ने वांगचुक के आंदोलन को सत्याग्रह की संज्ञा दी. उन्होंने कोर्ट को याद दिलाया कि वांगचुक की भूख हड़ताल एक सामूहिक फैसला था. यह किसी व्यक्ति का निजी एजेंडा नहीं बल्कि लद्दाख की जनता की मांग थी. सिब्बल ने वांगचुक की तुलना महात्मा गांधी से की. उन्होंने कहा कि जैसे गांधीजी ने चौरी-चौरा कांड के बाद अपना आंदोलन वापस ले लिया था. ठीक उसी तरह वांगचुक ने हिंसा होते ही अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी थी. वांगचुक ने लोगों से पत्थर या तीर उठाने के बजाय शांति का रास्ता चुनने को कहा था.
सिब्बल ने दलील दी कि ऐसे व्यक्ति को ‘देश की सुरक्षा के लिए खतरा’ बताना हास्यास्पद है. उन्होंने कहा कि वांगचुक लद्दाख को दुनिया के लिए एक उदाहरण बनाना चाहते थे. उनकी आवाज को दबाने के लिए ही उन पर झूठे आरोप मढ़े गए हैं.
क्या वांगचुक के खिलाफ अन्य सरकारी एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं?
कपिल सिब्बल ने कोर्ट का ध्यान एक और गंभीर मुद्दे की तरफ खींचा. उन्होंने बताया कि वांगचुक के खिलाफ यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई. अगस्त और सितंबर 2025 के दौरान उनके संस्थानों पर कई हमले हुए. वांगचुक से जुड़े संस्थानों की लैंड लीज रद्द कर दी गई. उन पर सीबीआई (CBI) की जांच बैठा दी गई. इतना ही नहीं, उन्हें इनकम टैक्स के नोटिस भी जारी किए गए.
सिब्बल ने कहा कि यह सब वांगचुक को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया गया. लद्दाख की छठी अनुसूची (6th Schedule) की मांग को दबाने के लिए यह साजिश रची गई. प्रशासन ने उन्हें एक अपराधी की तरह पेश करने की पूरी कोशिश की है. सिब्बल ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की आजादी का मामला नहीं है. यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे और विरोध करने के अधिकार का मामला है.
सुप्रीम कोर्ट का इस पूरे मामले पर क्या रुख रहा?
जस्टिस अरविंद कुमार और प्रसन्ना वराले की बेंच ने इस मामले को बहुत ध्यान से सुना. कोर्ट ने सिब्बल द्वारा दिखाए गए वीडियो को भी गंभीरता से लिया. सिब्बल ने साफ किया कि अगर सबूतों को छिपाया गया है तो डिटेंशन ऑर्डर तुरंत रद्द होना चाहिए. उन्होंने कहा कि वांगचुक ने बार-बार जेल से चिट्ठियां लिखीं. उन्होंने उन वीडियो की कॉपी मांगी थी जो उन पर आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल हुए. लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया. यहां तक कि उनकी पत्नी को भी डाक्यूमेंट्स लेने के लिए घंटों इंतजार कराया गया. सिब्बल की दलीलों ने प्रशासन के दावों की नींव हिला दी है. कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार दोपहर 2 बजे के लिए तय की है. अब सबकी निगाहें सोमवार पर टिकी हैं कि कोर्ट वांगचुक की रिहाई पर क्या फैसला सुनाता है.

डोनेट करें - जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर क्राइम कैप न्यूज़ को डोनेट करें.
 
Show More

Related Articles

Back to top button