दिल्ली

अभिषेक सिंघवी के लिए कैसे आई सुप्रीम कोर्ट से अच्छी खबर तो कपिल सिब्बल के लिए बुरी, आखिर क्या है मामला ?

Abhishek Manu Singhvi Vs Kapil Sibal: दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका पर फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को आरोपियों और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद के निरंतर कारावास को आवश्यक नहीं माना और उनकी जमानत मंजूर कर ली.

 

नई दिल्ली.
 दिल्ली दंगा मामलों से जुड़े UAPA केसों में सुप्रीम कोर्ट से आए दो अलग-अलग फैसलों ने कानूनी और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल को अपने मुवक्किल उमर खालिद के लिए बड़ा झटका लगा, तो दूसरी ओर अभिषेक मनु सिंघवी को उनकी क्लाइंट गुलफिश फातिमा के मामले में राहत भरी खबर मिली. सवाल यह है कि जब दोनों ही केस UAPA के तहत हैं दोनों ही 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े हैं तो फिर नतीजे इतने अलग क्यों रहे?
उमर खालिद को क्यों नहीं मिली जमानत?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने साफ कहा कि इस स्तर पर उनके खिलाफ लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने UAPA की धारा 43D(5) का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं, तो जमानत नहीं दी जा सकती.
उमर खालिद के लिए कपिल सिब्बल की 5 बड़ी दलीलें
  1. प्रत्यक्ष हिंसा में भूमिका नहीं
    सिब्बल ने कहा कि उमर खालिद किसी भी हिंसक घटना में मौके पर मौजूद नहीं थे और न ही उनके खिलाफ हथियार उठाने का कोई सबूत है.
  2. भाषण और व्हाट्सएप चैट को गलत संदर्भ में पेश किया गया
    उनका तर्क था कि अभियोजन पक्ष ने भाषणों और डिजिटल चैट्स को तोड़-मरोड़कर साजिश का रूप दिया.
  3. लंबी न्यायिक हिरासत
    सिब्बल ने कहा कि उमर खालिद चार साल से ज्यादा समय से जेल में हैं और ट्रायल की रफ्तार बेहद धीमी है.
  4. UAPA का दुरुपयोग
    सिब्बल ने दलील दी थी कि असहमति और विरोध को आतंकवाद से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
  5. पहले के फैसलों का हवाला
    सिब्बल ने के.ए. नजीब जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि लंबी हिरासत अपने आप में जमानत का आधार हो सकती है.

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