दिल्ली

बिल्डरों ने इसे मस्जिद बताया, यह स्लम में बना अवैध ढांचा, महरौली मदरसा विवाद पर CJI सूर्यकांत

CJI Suryakant on Illegal Madrasa: अवैध कब्जे को मदरसे का नाम देकर साजिश रचने वालों पर सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग हैं जो बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार को डकार जा रहे हैं. उनको शिक्षा से वंचित करने की कोशिश कर रहे हैं.

 

CJI Suryakant on Illegal Madrasa: सुप्रीम कोर्ट में अवैध निर्माण और धार्मिक ढांचों के ध्वस्तीकरण पर सोमवार को सुनवाई हुई. इसमें मामले दखिल दो अलग-अलग याचिकाओं को लेकर चल रही सुनवाई हुई. एक मामला मेहरौली–बदरपुर रोड स्थित एक मदरसे के ध्वस्तीकरण और दूसरा महाराष्ट्र में एक मदरसे को मस्जिद बनाए जाने की याचिका थी. दोनों पर याचिकाओं पर सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने सुनवाई की. मेहरौली–बदरपुर रोड स्थित एक मदरसे के ध्वस्तीकरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं को ऐसी फटकार लगाई. उन्होंने न केवल निर्माण की वैधता पर सवाल उठाए, बल्कि इसके पीछे छिपे ‘बिल्डरों के खेल’ और ‘फर्जी नैरेटिव’ की भी पोल खोल दी.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मस्जिद बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत में अपनी दलील दी तभी सीजेआई भड़क उठे. सीजेआई सूर्यकांत (Supreme Court CJI Suryakant) ने मीनाक्षी की दलील पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हमें भ्रम में मत डालिए. यदि यह कोई ऐतिहासिक संरचना (Historical Structure) होती, तो अदालत निश्चित रूप से संवेदनशीलता के साथ इस पर सुनवाई करती. लेकिन हकीकत यह है कि यह एक स्लम क्षेत्र में बना अवैध ढांचा है.’

मदरसे को ‘मस्जिद’ बनाने का खेल?

महाराष्ट्र के एक मदरसा-मस्जिद सुनवाई के दौरान CJI ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक, जमीन केवल ‘मदरसे’ के उद्देश्य के लिए दी गई थी और अब तक इसे मदरसा ही कहा जा रहा था. सीजेआई सूर्यकांत (CJI Suryakant) ने गुस्से भरे लहजे में कहा, ‘मस्जिद शब्द का इस्तेमाल बाद में बिल्डरों द्वारा किया गया.’ कोर्ट का इशारा साफ था कि कानूनी कार्रवाई से बचने या मामले को धार्मिक रंग देने के लिए परिभाषाओं में हेर-फेर की जा रही है.

चाहते हैं कि हम मुंह खोलें?: CJI की चेतावनी

वहीं, सीजेआई ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें जारी रखीं, तो मुख्य न्यायाधीश ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ‘अगर आप चाहते हैं कि हम अपना मुंह खोलें, तो अब हम खोलेंगे.’ उन्होंने कहा कि मदरसा चलाने के लिए अतिरिक्त जमीन भी आवंटित की गई थी, लेकिन अब आप में से ही कोई तो एक व्यक्ति आकर पूरी विकास प्रक्रिया को रोकने की कोशिश कर रहा है. आप अवैध कब्जे के फिराक में हैं.

क्या गरीबों के बच्चों को पढ़ने का हक नहीं?

 

सीजेआई ने मस्जिद को मदरसा बताकर स्लम में अवैध कब्जे पर कटाक्ष करते हुए इसे शिक्षा के अधिकार से जोड़ा. CJI ने याचिकाकर्ताओं की नीयत पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा, ‘आप स्लम डेवलपमेंट अथॉरिटी को बता रहे हैं कि हम मदरसा चला रहे हैं, लेकिन हकीकत में आप बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं. क्या स्लम के गरीब बच्चों को मदरसे में पढ़ने का हक नहीं है? हम यहां ‘शिक्षा के अधिकार’ (Right to Education) की बात कर रहे हैं और आप उसे ही रोकने में लगे हैं.’

किसके इशारे पर हो रहा, सब मालूम है

सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में ‘पर्दे के पीछे’ चल रहे खेल को भी उजागर किया. सीजेआी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत को अच्छी तरह पता है कि ये याचिकाएं किसके इशारे पर दायर की जा रही हैं. उन्होंने कहा, ‘एक याचिकाकर्ता अदालत आता है, और फिर दूसरा याचिकाकर्ता उसी मामले में अलग याचिका दायर कर उसे डिफॉल्ट में खारिज करवा देता है.’ कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना.

 

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