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कैसी है ‘मेंटल टॉर्चर’ पर बनी फिल्म ‘कलिका’?Kalika Movie Review

 फिल्म ‘कलिका’ मेंटल एब्यूज को लेकर जागरूकता बढ़ाने वाली एक प्रभावी फिल्म है जिसके लिए राइटर-डायरेक्टर रौशनी श्रीवास्तव बधाई की पात्र हैं. वह इस फिल्म में लीड एक्ट्रेस की भी भूमिका में हैं. अगर आप इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं तो उससे पहले जान लीजिए कैसी है फिल्म?

आज ऐसा जमाना है जहां इंसानियत लोग भूलते जा रहे हैं. बहुत बड़ी आबादी मानसिक शोषण की शिकार है और ये एक ऐसा अभिशाप है जो कई बीमारियो को जन्म देता है. मानसिक शोषण से कोई व्यक्ति चिंता, उदासी, चिड़चिड़ापन का शिकार हो जाता है. ऐसी स्थिति में वो किसी भी प्रकार का कोई फैसला भी खुद से नहीं कर पाता. सिनेमाघरों मे रिलीज हुई फिल्म ‘कलिका’ मेंटल एब्यूज को लेकर जागरूकता बढ़ाने वाली एक प्रभावी फिल्म है जिसके लिए राइटर, डायरेक्टर और एक्ट्रेस रौशनी श्रीवास्तव बधाई की पात्र हैं.

ये सिनेमा कलिका (रौशनी श्रीवास्तव) नाम की एक लड़की की है जो एक्ट्रेस बनने का सपना लेकर मुंबई आई है. वह ऑडिशन देती है… संघर्ष करती है. उसका सबसे करीबी दोस्त अथर्व (सार कश्यप) भी एक अभिनेता है जो अपने हिस्से का स्ट्रगल कर रहा है. इसी बीच कलिका कई साल पुराने अपने एक दोस्त राम (राजा गुरु) के संपर्क मे आती है जो अब दिल्ली मे रहता है और जिसने प्रॉपर्टी में करियर बनाया है. वह कलिका की फिल्म का निर्माण करने को तैयार हो जाता है और वह कई लाख रुपए कलिका के अकाउंट में भेज देता है.
राम को इसके बदले कलिका का साथ और हाथ दोनों चाहिए, मगर कलिका किसी पिंजरे में कैद रहने को तैयार नहीं है. वह रिलेशनशिप कुबूल करने से मना करती है तो राम के अंदर का रावण जाग जाता है. वह उस पर मानसिक अत्याचार करना शुरू करता है. कलिका उसकी हरकतों से मेंटली डिस्टर्ब हो जाती है. इस हालत से निकलने के लिए वह क्या करती है उसके लिए आपको पूरी फिल्म देखनी होगी. फिल्म ‘कलिका’ का सब्जेक्ट और इसका कॉन्सेप्ट काफी अहम है. फिल्म में ये दिखाया गया है कि महिलाओं के साथ हो रहा मानसिक शोषण शारीरिक शोषण से कहीं ज्यादा हानिकारक है. आज कल के वातावरण में इस टॉपिक को लेकर जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण है.
पिक्चर कलिका में तीनों प्रमुख आर्टिस्ट रौशनी श्रीवास्तव, राजा गुरु और सार कश्यप के अभिनय मे एक लय नजर आती है. फिल्म के टाइटल रोल कलिका को रौशनी श्रीवास्तव ने जीवंत कर दिया है. मानसिक रूप से जब वह बिखरती हैं तो उस सीन या शॉट को उन्होंने बड़ी सहजता से पेश किया है. उन्हें इस भूमिका में कई प्रकार की भावनाओं को प्रकट करने का मौका मिला है जिसे उन्होंने बखूबी अदा किया है. राम के रोल में राजा गुरु ने तो कमाल कर दिया है. ग्रे शेड लिए हुआ उनका ये किरदार उनकी अभिनय क्षमता को सिद्ध करता है. राम एक सेकंड में जो जज्बात बदल देता है वह खतरनाक है. अथर्व के रोल मे सार कश्यप ने भी अपना 100 प्रतिशत दिया है.
फिल्म ‘कलिका’ मे डायरेक्टर के रूप में रौशनी श्रीवास्तव कामयाब साबित हुई हैं. अपने आपको उसी फिल्म में निर्देशित करना बहुत चैलेंजिंग रहता है, लेकिन वह इस परीक्षा में भी सफल सिद्ध हुई है. उन्होंने बाकी आर्टिस्ट से बेहतर अदाकारी निकलवाई है.
कलिका एक ऑफ बीट सिनेमा है जिसमें तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है. स्टोरी को भटकने नहीं दिया गया है इसलिए कोई गाना भी नहीं है, मगर इसका बैकग्राउंड स्कोर याद रह जाता है. फिल्म कलिका एक आंख खोलने वाला सिनेमा है. मेरी ओर से फिल्म 5 में से 3 स्टार.

 

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