चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की मोर्चेबंदी, ‘सामना’ में शिवसेना UBT का दावा- दिल्ली तक लगेगा झटका

चुनाव आयोग के खिलाफ वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विपक्ष एकजुट होकर मोर्चा खोले हुए हैं। इस बीच शिवसेना यूबीटी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में पार्टी ने दावा किया है कि यह महारैली दिल्ली तक चुनाव आयोग का झटका देगा।
मुंबई
महाराष्ट्र में मतदाता सूची में धांधली के आरोपों पर विपक्ष एकजुट होकर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। विपक्ष ने एक करोड़ फर्जी वोटरों का आरोप लगाते हुए महारैली निकाल रहा है। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), कांग्रेस और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) मुंबई में संयुक्त विरोध मार्च में शामिल है।
ईवीएम से लेकर वोटर लिस्ट तक घोटाले का आरोप
सामना के संपादकीय में कहा गया है, “सभी दलों का यह मोर्चा दिल्ली में चुनाव आयोग को झकझोर देगा।” इसमें दावा किया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से लेकर मतदाता सूची तक में घोटाला हुआ है।
60 लाख से ज्यादा मतदाताओं को जोड़ने का दावा
शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में अनियमितताओं के कारण ही भाजपा 2014 से जीत रही है। संपादकीय में आगे कहा गया है कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र में 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाएगा। इसमें कहा गया है कि नासिक में 3.5 लाख दोहरे मतदाता हैं, जबकि दिवा, जो ठाणे नगर निगम सीमा का हिस्सा है,उसमें 17,000 दोहरे मतदाता हैं।
विपक्षी दलों का यह विरोध मार्च मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं जैसे डुप्लिकेट नाम, गलत तरह से नाम हटाना और गलत जोड़ने के खिलाफ है। दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग इन गड़बड़ियों पर आंखें मूंदे बैठा है। विपक्ष ने मांग की है कि स्थानीय निकाय चुनाव तब तक न कराए जाएं, जब तक मतदाता सूची की खामियों को दुरुस्त नहीं किया जाता।
चुनाव आयोग पर कार्रवाई क्यों नहीं? शिवसेना ने पूछा सवाल
इस बीच एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार के खिलाफ मुंबई पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पवार पर ट्रंप के नाम का फर्जी आधार कार्ड बनाने और उसका इस्तेमाल फर्जी वोटर रजिस्टर करने का आरोप है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने सवाल उठाया कि अगर रोहित पवार पर कार्रवाई हो सकती है, तो चुनाव आयोग पर क्यों नहीं? जिसने लाखों फर्जी नाम मतदाता सूची में जोड़े हैं।




