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हिरासत में मौत…पुलिस अफसरों को 7 अक्तूबर तक गिरफ्तार करने का आदेश; शीर्ष कोर्ट ने क्या दी चेतावनी, जानें

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करें। अगर पालन नहीं किया जाता है, तो हम जानते हैं कि पालन कैसे करवाया जाता है। हम न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत आरोप तय करेंगे और उसके परिणाम भुगतने होंगे।

 

नई दिल्ली

 

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि वह 26 वर्षीय देवा पारधी की हिरासत में हुई मौत के लिए जिम्मेदार माने जा रहे दो पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार करने में विफल रहने पर सीबीआई और मध्य प्रदेश राज्य के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आरोप तय करेगा। शीर्ष अदालत ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए सीबीआई को 7 अक्तूबर तक का समय दिया।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करें। अगर पालन नहीं किया जाता है, तो हम जानते हैं कि पालन कैसे करवाया जाता है। हम न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत आरोप तय करेंगे और उसके परिणाम भुगतने होंगे। हम आपको एक अवसर दे रहे हैं। हम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। हम अभी आरोप तय करने में जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। पीठ पारधी की मां द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें न्यायालय के 15 मई, 2025 के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। उस आदेश में सीबीआई को घटना के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों को एक महीने के भीतर गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था।

न्यायालय ने यह कहते हुए जांच सीबीआई को हस्तांतरित कर दी कि राज्य पुलिस मामले को दबाने और प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। इस मामले में आरोपी दो पुलिस अधिकारी, संजीत सिंह मावई और उत्तम सिंह कुशवाह अप्रैल 2025 से फरार हैं।
कार्रवाई हुई तो जांच अधिकारी कोर्ट में मौजूद होंगे
पीठ ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि प्रतिवादी (सीबीआई और राज्य पुलिस के अधिकारी) इस न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें और 7 अक्तूबर या उससे पहले अनुपालन की सूचना दें। यदि अनुपालन होता है तो याचिकाकर्ता के वकील इसका उल्लेख कर सकते हैं और मामला 8 अक्तूबर को सूचीबद्ध किया जाएगा। यदि अनुपालन नहीं होता है तो राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और सीबीआई के जांच अधिकारी न्यायालय में उपस्थित होंगे। अदालत ने मंगलवार को सीबीआई को दोनों फरार अधिकारियों का पता लगाने और गिरफ्तार करने में असमर्थ रहने पर फटकार लगाई थी।

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