क्राइम
93 एकड़ जमीन का मालिक, बेटा एक करोड़ फिरौती देने को था तैयार, फिर भी मार दिया, रोंगटे खड़े कर देगा यह वारदात

महाराष्ट्र के जालना के एक अमीर किसान तुकाराम गवाने पाटिल की बेरहमी से हत्या की कहानी सुनकर रूह कांप जाएगी. 93 एकड़ जमीन और बड़े व्यापार के मालिक का उन्हीं का एक दोस्त ने 1 करोड़ की फिरौती के लिए अपहरण किया। बेटा पैसे लेकर दर-दर भटकता रहा, लेकिन पहचान उजागर होने के डर से आरोपियों ने किसान को मौत के घाट उतार दिया। छत्रपति संभाजीनगर के कन्नड़ घाट में मिली लाश ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है. महाराष्ट्र पुलिस ने कैसे मास्टरमाइंड समेत 5 को दबोचा और क्यों की गई तुकाराम की हत्या इसकी इनसाइड स्टोरी और खौफनाक है.
जालना.
महाराष्ट्र के जालना जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है, जहां दौलत के लालच में इंसानी रिश्तों और भरोसे का कत्ल कर दिया गया. एक संपन्न किसान, जिनके पास 93 एकड़ जमीन थी और जो चावल के बड़े व्यापारी थे, उनका अपहरण कर बेरहमी से हत्या कर दी गई. खास बात यह है कि अपहरण करने वाला कोई और नहीं बल्कि दोस्त ही निकला. अपहरणकर्ताओं ने उनकी जान के बदले एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी, लेकिन जब उन्हें लगा कि वे पकड़े जा सकते हैं तो उन्होंने किसान को चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतार दिया और शव को गहरी खाई में फेंक दिया. महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन एक दोस्त ने क्यों की गद्दारी?
मृतक की पहचान जालना जिले के सिल्लोड तालुका के बोडवाड निवासी तुकाराम गवाने पाटिल के रूप में हुई है. तुकाराम न केवल एक समृद्ध किसान थे, बल्कि इलाके के प्रतिष्ठित नागरिक और बड़े चावल व्यापारी भी थे. उनके पास करीब 93 एकड़ उपजाऊ जमीन थी. उनकी संपन्नता ही उनकी दुश्मन बन गई और उनके एक परिचित ने ही उनकी दौलत पर नजर गड़ा दी. यह परिचित कोई और नहीं बल्कि उनका दोस्त निकला.
कौन थे तुकाराम गवाने पाटिल?
बीते शनिवार शाम तुकाराम गवाने पाटिल उंडांगांव के एक व्यापारी मुकेश पंडित से मक्का की फसल के पैसे लेने गए थे. वहां से एक लाख रुपये नकद लेकर वे अपनी दोपहिया गाड़ी से घर लौट रहे थे. शाम करीब 7 बजे, जब वे सुनसान रास्ते से गुजर रहे थे, तभी पांच संदिग्धों ने उनका रास्ता रोका और उन्हें जबरन अगवा कर लिया. आरोपी उन्हें उनकी ही गाड़ी से उठाकर छत्रपति संभाजीनगर के अलग-अलग इलाकों में ले गए.
एक करोड़ की फिरौती
अपहरण के अगले दिन यानी रविवार की सुबह तुकाराम के घर वालों के पास एक कॉल आया. फोन तुकाराम के ही मोबाइल से किया गया था. फोन करने वाले ने कड़क आवाज में धमकी दी कि अगर तुकाराम को जिंदा देखना चाहते हो तो एक करोड़ रुपये का इंतजाम करो. किसान के बेटे ने अपने पिता की जान बचाने के लिए तुरंत पैसों का इंतजाम किया और फिरौती देने के लिए तैयार हो गया.
अपहरणकर्ताओं की शातिर चाल
अपहरणकर्ताओं ने पुलिस से बचने के लिए शातिर चाल चली. उन्होंने तुकाराम के बेटे को पैसे लेकर संभाजीनगर बुलाया, लेकिन वे लगातार अपनी लोकेशन बदलते रहे. आरोपियों ने उसे पहले संभाजीनगर बस स्टॉप बुलाया, फिर सेंट्रल नाका, उसके बाद कलेक्टर कार्यालय, टीवी सेंटर, अंबेडकर चौक और बाबा पेट्रोल पंप जैसी जगहों पर चक्कर कटवाए. बेटा अपने पिता की सलामती के लिए एक करोड़ रुपये का बैग लेकर शहर भर में भटकता रहा, लेकिन अंत में आरोपियों ने यह कहकर फोन काट दिया कि ‘हमें पैसे नहीं चाहिए’
पहचान उजागर होने का डर
पहचान उजागर होने का डर और बेरहम कत्ल. दरअसल, अपहरण की इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड सचिन बंकर था, जो तुकाराम का करीबी परिचित था. पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों को डर था कि अगर वे पैसे लेकर तुकाराम को छोड़ देते हैं तो तुकाराम उन्हें पहचान लेंगे और वे पकड़े जाएंगे. इसी डर के कारण उन्होंने पैसे लेने का इरादा छोड़ दिया और तुकाराम को रास्ते से हटाने का फैसला किया.
कैसे जाल में फंसा अपहरणकर्ता?
आरोपियों ने तुकाराम गवाने पाटिल पर चाकुओं से कई वार किए. जब वे लहूलुहान होकर गिर पड़े तो आरोपियों ने उनकी पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के उद्देश्य से उनके शरीर को कन्नड़ घाट की गहरी खाई में फेंक दिया. पुलिस की कार्रवाई और हाईटेक जांच जब तुकाराम का फोन बंद हो गया तो परिवार ने पुलिस को सूचित किया. पुलिस ने मोबाइल टावर डेटा और कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच शुरू की. पुलिस ने पाया कि तुकाराम के नंबर से कॉल हो रहे थे और उसी टावर रेंज में दो अन्य मोबाइल नंबर भी लगातार एक्टिव थे. इसी तकनीकी सुराग का पीछा करते हुए पुलिस ने घेराबंदी की.
कब और कैसे तुकाराम की हत्या हुई?
पुलिस की टीम ने समृद्धि महामार्ग पर पीछा करके एक कार को रोका, जिसमें चार आरोपी सवार थे. उनकी निशानदेही पर पांचवें आरोपी को लिखाखेड़ी से गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार आरोपियों के नाम सचिन बंकर, अजिनाथ उर्फ अजय सपकाल, वैभव रंगोट, विशाल खरात और दीपक जाधव हैं. पुलिस अब इन सभी से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस साजिश में कोई और भी शामिल था.
इस घटना के बाद पूरे जालना और संभाजीनगर इलाके में भारी आक्रोश है. 93 एकड़ जमीन के मालिक और एक प्रतिष्ठित व्यापारी की इस तरह से हत्या ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. तुकाराम गवाने पाटिल का शव कन्नड़ घाट से बरामद कर लिया गया है और पोस्टमार्टम के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है.




