दिल्ली

सेबी की नाक के नीचे 33 साल से घोटाले कर रहा ये आदमी, अब तक 4 बड़े स्‍कैम, हर्षद मेहता के साथ मिलकर की थी शुरुआत

 साल 1992 में हर्षद मेहता के साथ सहयोगी के रूप में घोटाले की शुरुआत करने वाले केतन मेहता ने साल 2025 तक 4 बड़े घोटालों को अंजाम दिया. बैन के बावजूद वे मार्केट में स्‍कैम करते रहे.

नई दिल्‍ली.
भारतीय शेयर बाजार पिछले 33 साल से घोटाले पर घोटाला कर रहे केतन पारेख (Ketan Parekh) पर अब तक पूरी तरह शिकंजा नहीं कसा जा सका है. पारेख ने घोटाले की शुरुआत हर्षद मेहता के साथ की थी, जिनका नाम अब तक के सबसे बड़े घोटालेबाजों में गिना जाता है. हर्षद मेहता तो आज से 33 साल पहले घोटाला करने के बाद पकड़े गए और उनका सफर थम गया, लेकिन केतन पारेख ने तब से अब तक 5 बड़े घोटालों को अंजाम दिया. आखिरी वाला तो इसी साल 2025 में किया था. अब उन्‍होंने सरकार से विदेश यात्रा की अनुमति मांगी है. आखिर कैसे केतन घोटाले पर घोटाले करते जा रहे और उन पर कोई शिकंजा नहीं कसा जा सका है.

केतन पारेख एक चार्टर्ड अकाउंट हैं और उन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1980 के दशक में मुंबई के एक ब्रोकर नरभराम हरखचंद सिक्‍योरिटीज से किया था. बाद में उन्‍होंने खुद की स्‍टॉक ब्रोकिंग कंपनी शुरू की थी. यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन साल 1990 के दशक में उनकी मुलाकात हुई हर्षद मेहता से और उनके साथ ग्रोमोर इन्‍वेस्‍टमेंट में काम भी किया और यहीं से शुरू हुआ मार्केट मैनिपुलेशन का काम. हर्षद और केतन दोनों ही मार्केट मैनिपुलेशन में माहिर थे. साल 1992 में हर्षद और केतन ने मिलकर पहला बड़ा घोटाला किया और तब आज तक पारेख रुके नहीं.
1992 में किया पहला बड़ा घोटाला
उन दिनों हर्षद मेहता को बिग बुल कहा जाता था और केतन उनके सहयोगी थे. हर्षद ने बैंकों के फंड का इस्‍तेमाल शेयर बाजार में निवेश के लिए किया, जिसके लिए रेडी फॉरवर्ड (RF) का इस्‍तेमाल किया गया. RF डील्‍स में एक बैंक दूसरे बैंक को सरकारी सिक्‍योरिटीज बेचता था और वापस खरीद लेता था, जो एक तरह का शॉर्ट टर्म लोन था. मेहता ने एसबीआई, नेशनल हाउसिंग बैंक और केनरा बैंक से RF डील के जरिये बड़ी मात्रा में पैसे निकले और शेयर बाजार में लगाए. इसके लिए बैंकों को फर्जी रिसीप्‍ट दी, जो सिक्‍योरिटीज की डिलीवरी दिखाती थी जबकि वास्‍तव में कोई डिलीवरी नहीं होती थी. इन पैसों से छोटे स्‍टॉक की कीमतें बढ़ाईं और सेंसेक्‍स को 1,500 अंकों से बढ़ाकर 4,500 अंक तक पहुंचा दिया. हर्षद ने करीब 5 हजार करोड़ रुपये का गलत इस्‍तेमाल किया. कई छोटे बैंक दिवालिया हो गए. हर्षद पर तो कई मुकदमे चले, लेकिन केतन को सिर्फ एक साल की सजा मिली.
2001 का K-10 घोटाला
केतन पारेख ने हर्षद मेहता की शार्गिदी में घोटाले की पूरी एबीसीडी सीख ली थी और अब वह अकेले घोटाले को अंजाम देने निकल पड़े. साल 2001 में उन्‍होंने स्‍टॉक मार्केट मैनिपुलेशन घोटाला यानी के-10 घोटाला किया. केतन ने फर्जी तरीके से छोटे मार्केट कैप वाली कंपनियों के शेयरों की कीमत बढ़ानी शुरू कर दी. इसमें Zee Telefilms, Visualsoft, Sonata Software जैसे स्‍टॉक शामिल थे. Zee Telefilms के स्‍टॉक की कीमत तो 127 रुपये से 10 हजार तक पहुंच गई थी. केतन माधवपुरा मर्चेंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक के डायरेक्‍टर थे. उन्‍होंने इस बैंक से बड़े लोन लेकर छोटे स्‍टॉक खरीदे. फिर अपने ही ग्रुप के ट्रेडर्स के बीच फर्जी ट्रांजेक्‍शन से सर्कुलर ट्रेडिंग की और प्रमोटर्स व बड़े निवेशकों से साठगांठ कर एक झटके में सारे के-10 स्‍टॉक बेच दिए और मार्केट क्रैश हो गया. सीबीआई कोर्ट ने 2 साल की सजा दी और सेबी ने 14 साल के लिए ट्रेडिंग पर बैन लगा दिया.
बैन के बाद भी 2009 में घोटाला
केतन ने सेबी के बैन लगाने के बावजूद साल 2009 में एक और घोटाले को अंजाम दिया. इस बार उन्‍होंने करीबी सहयोगियों के नाम पर बनी 26 फ्रंट एंटिटीज यानी कंपनियों और खातों के जरिये ट्रेडिंग की. इसका इस्‍तेमाल कर स्‍टॉक की कीमतों में हेराफेरी की और बाजार से खूब अवैध लाभ कमाया. इसमें एक ही स्‍टॉक को कइ्र बार खरीदा-बेचा गया जिससे उसकी कीमत बढ़ गई और उन्‍हें बेचकर पैसा कमाया. सेबी ने देखा कि कुछ स्‍टॉक की कीमतें असामान्‍य रूप से बढ़ रही हैं तो उसने जांच की और सभी एंटिटीज पर बैन लगा दिया. कमाए गए लाभ पर जुर्माना भी वसूला गया.
साल 2025 में किया फ्रंट-रनिंग घोटाला
सेबी की ओर से लगाए गए बैन की अवधि खत्‍म होते ही केतन ने साल 2025 में एक और घोटाले को अंजाम दे डाला. केतन ने अमेरिका स्थित फॉरेन फंड के ट्रेड्स का फ्रंट रनिंग यानी ट्रेडिंग से पहले ही अंदरूनी जानकारी जुटाकर 66 करोड़ रुपये कमा लिए. घोटाला करने के लिए केतन ने सिंगापुर के रोहित सालगांवकर का सहारा लिया, जिनके पास मोतीलाल ओसवाल और नुवामा ब्रोकर्स का रेफरल अरेंजमेंट था. रोहित के जरिये फंड की ट्रेड इंफो कोलकाता के एसोसिएट्स तक पहुंचाई. इसके बाद वे फंड के ट्रेड से पहले ही ट्रेड करके दाम प्रभावित करते और मुनाफा कमाते. मामला खुलने पर सेबी ने बैन लगाया और अवैध रूप से कमाए गए लाभ को वापस करने का आदेश दिया. उनके डीमैट खाते और बैंक खाते भी सीज कर दिए.

 

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