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साधना- राजेंद्र कुमार का सुपरहिट गाना, रिकॉर्डिंग के बाद जयकिशन से नाराज थीं लता मंगेशकर, कहा-‘इतनी तकलीफ…’

Arzoo Movie: लता मंगेशकर ने एक दफा संगीतकार जयकिशन को कुछ ऐसा कह दिया था कि वे दुखी हो गए थे. लता दीदी ने यह बात साधना पर फिल्माए एक गाने को लेकर कही थी. हालांकि​ बाद में मामला शांत हो गया था. आइए, song of the week में आज इसी गाने पर बात करते हैं….

मुंबई.

सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर के गाने आज भी सदाबहार हैं. जिस भी गाने को उन्होंने आवाज दी थी, वह अमर हो गया. उनके गानों की ​यदि लिस्ट बनाई जाए तो यह यकीनन बहुत लंबी होती जाएगी. कहा जाता था कि लता दीदी को कोई भी गाना दे दिया जाए, वे उसे संगीतकारों के मनमुताबिक गा दिया करती थीं. यहां तक कि ऊंचे सुर वाले गाने भी वे बेहद आसानी से गा दिया करती थीं. यही वजह है कि उनके साथ हर संगीतकार निश्चिंत होकर काम करता था. लेकिन एक दफा लता ने संगीतकार जयकिशन को ऐसी बात कह दी कि वह उनको चुभ गई थी. आइए, song of the week में आज इसी गाने पर बात करते हैं….

लता दीदी ने क्या कहा और जय किशन को क्यों बुरा लगा, यह बताने के पहले आपको गाने के बारे में बता देते हैं. गाना है…’अजी रूठकर अब कहां जाइएगा…जहां जाइएगा हमें पाइएगा…’. यह गाना ​15 जनवरी 1965 को रिलीज हुई फिल्म ‘आरजू’ का है. रामानंद सागर निर्देशित इस फिल्म में साधना, राजेंद्र कुमार और फिरोज खान ने अहम भूमिका निभाई थी. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई ​थी और इसके सभी गाने भी बेहद हिट रहे थे. अब जरा आप इस गाने को गुनगुनाने की काेशिश कीजिए… आपको इसके ऊंचे सुर का अंदाजा लग जाएगा. बस, यही नाराजगी की वजह बना था.

गायकों की तकलीफ का अंदाजा…
फिल्म ‘आरजू’ का संगीत शंकर जयकिशन ने दिया था और लिरिक्स हसरत जयपुरी के थे. फिल्म के लिए ‘अजी रूठकर अब..’ साधना पर पिक्चराइज किया गया था. इस गाने के लिए लता मंगेशकर से बात की गई थी. लता दीदी ने गाना रिकॉर्ड करने के बाद जयकिशन से कहा, ‘जयकिशन साहब गाना बहुत ही सुंदर है लेकिन इसे गाते समय मुझे कितनी तकलीफों से गुजरना पड़ा जरा इसका अंदाजा लगाइए. आप ऐसे गाने क्यों बनाते हैं, जिसमें गायकों के प्रति जरा भी सहानुभूति नहीं होती.’ लता की यह बात सुनकर जयकिशन भी थोड़े खफा हो गए थे. लेकिन उन्होंने बात को संभालते हुए कहा, ‘आप ही तो ऐसी गायिका हैं, जो हर ऊंचे सुर में जाकर गा सकती हैं.’

लता ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘जयकिशन को हमेशा लगता था कि मैं कितने ही ऊंचे स्वर में गा सकती हूं. एक बार जिस नोट पर गा लिया अगर कोशिश करूं तो उस से भी ऊंचे स्वर में गा सकती हूं. हम दोनों की अक्सर इस पर बहस हुआ करती थी.’

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