दिल्ली

CJI चंद्रचूड़ ने स्वतंत्रता दिवस पर किया बड़ा ऐलान, सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग का होगा विस्तार, प्लान भी किया शेयर

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि दूसरे चरण में, 12 अतिरिक्त कोर्ट रूम बनाने के लिए मौजूदा इमारत को कुछ हद तक ध्वस्त किया जाएगा. उन्होंने सभा में मौजूद लोगों को केंद्र सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के बारे में भी बताया और कहा कि फाइल अब न्याय विभाग के पास है.

नई दिल्ली.

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को कहा कि शीर्ष अदालत अपनी इमारत का विस्तार करने की योजना बना रही है. सुप्रीम कोर्ट के लॉन में स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए सीजेआई ने कहा कि नई इमारत में 27 अतिरिक्त कोर्ट रूम, 4 रजिस्ट्रार कोर्ट रूम और वकीलों और वादियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं होंगी.

जल्द से जल्द न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि पहले चरण में, 15 कोर्ट रूम, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) के लिए बैठक कक्ष एवं महिला बार रूम बनाने के लिए संग्रहालयों और सहायक भवन को ध्वस्त कर दिया जाएगा.

 

सीजेआई ने कहा कि दूसरे चरण में, 12 अतिरिक्त कोर्ट रूम बनाने के लिए मौजूदा इमारत को कुछ हद तक ध्वस्त किया जाएगा. उन्होंने सभा में मौजूद लोगों को केंद्र सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के बारे में भी बताया और कहा कि फाइल अब न्याय विभाग के पास है.

सीजेआई ने किया पीएम मोदी के भाषण का जिक्र
बाद में, उन्होंने लाल किले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का भी उल्लेख किया, जहां पीएम ने कहा कि शीर्ष अदालत ने फैसला किया है कि फैसलों के ऑपरेटिव हिस्से का वादी की भाषा में अनुवाद किया जाएगा. सीजेआई ने कहा कि अब तक 9,423 फैसलों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है, जिनमें हिंदी में 8000 से ज्यादा फैसले शामिल हैं. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य सभी 35,000 फैसलों का सभी भारतीय भाषाओं में अनुवाद करना है और इससे अदालतों में क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल में भी आसानी होगी.

सीजेआई ने बताई टेक्नोलॉजी की अहमियत
ई-कोर्ट पर सीजेआई ने कहा, “वे कहते हैं – धूप सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है. मैं कहता हूं – न्यायिक प्रक्रियाओं के आसपास की अक्षमता और अस्पष्टता को खत्म करने के लिए प्रौद्योगिकी हमारे पास सबसे अच्छा उपकरण है. हमें न्याय में प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी की पूरी क्षमता का उपयोग करना होगा. इसके अनुसरण में, हम ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण को लागू कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा, ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण का उद्देश्य देश भर की सभी अदालतों को आपस में जोड़कर, कागज रहित अदालतों के बुनियादी ढांचे की स्थापना, अदालती रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और सभी न्यायालय परिसर में उन्नत ई-सेवा केंद्र स्थापित करके भारत में अदालतों के कामकाज में क्रांतिकारी बदलाव लाना है.

डोनेट करें - जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर क्राइम कैप न्यूज़ को डोनेट करें.
 
Show More

Related Articles

Back to top button
Close