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केन्द्र सरकार ने संजय मिश्रा को तीसरा सेवाविस्तार क्यों दिया:कपिल सिब्बल

ED निदेशक संबंधी बयान पर बोले सिब्बल: संजय मिश्रा को तीसरा सेवाविस्तार क्यों दिया…..

केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को बड़ा झटका लगा।सुप्रीम कोर्ट ने ED चीफ संजय मिश्रा को तीसरा एक्सटेंशन देने का आदेश रद्द कर दिया।बता दें कोर्ट ने कहा कि ED चीफ का तीसरी बार एक्सटेंशन सही नहीं है।इसी बीच  राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने केंद्रीय  गृह मंत्री अमित शाह के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक के संबंध में दिए गए एक कथित बयान पर बुधवार को तंज करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने जांच एजेंसी के प्रमुख संजय कुमार मिश्रा को तीसरी बार सेवा विस्तार क्यों दिया।

परिवारवादियों के बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पर नजर रखेगा

आपको बता दें सिब्बल ने यह बात उच्चतम न्यायालय द्वारा ईडी के प्रमुख संजय कुमार मिश्रा के संबंध में मंगलवार को सुनाए गए फैसले के बाद कही। उच्चतम न्यायालय ने मिश्रा के एक-एक साल के दो लगातार सेवा विस्तार को मंगलवार को अवैध करार दिया तथा कहा कि केंद्र सरकार का संबंधित आदेश 2021 के उसके उस निर्णय का ‘उल्लंघन’ है, जिसमें कहा गया था कि आईआरएस अधिकारी मिश्रा को आगे सेवा विस्तार नहीं दिया जाना चाहिए।न्यायालय के फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा था कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि ईडी का निदेशक कौन है, क्योंकि जो कोई भी इस पद पर होगा, वह विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले परिवारवादियों के बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पर नजर रखेगा।

सिब्बल ने ट्वीट किया, ‘‘ संजय मिश्रा (ईडी) प्रमुख। उच्चतम न्यायालय ने नवंबर तक के सेवा विस्तार को अवैध बताया है। अमित शाह: ‘ईडी ऐसी संस्था है जो किसी भी व्यक्ति से बड़ी है ’ तब अपने उन्हें तीसरा सेवा विस्तार क्यों दिया ?’’

उन्होंने कहा,‘‘ कुछ लोग सत्तारूढ़ दल का राजनीतिक हित साधते हैं।’’न्यायालय ने अपने आदेश के जरिये मिश्रा (62) का विस्तारित कार्यकाल घटाकर 31 जुलाई तक कर दिया। शीर्ष अदालत का यह आदेश केंद्र सरकार के लिए एक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, संजय मिश्रा को पहली बार 19 नवंबर, 2018 को दो साल के लिए ईडी का निदेशक नियुक्त किया गया था। बाद में 13 नवंबर, 2020 के एक आदेश के जरिये केंद्र सरकार ने नियुक्ति पत्र को पूर्व प्रभाव से संशोधित किया और उनका दो साल का कार्यकाल बदलकर तीन साल कर दिया गया।सरकार ने पिछले साल एक अध्यादेश जारी किया था, जिसके तहत ईडी और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) प्रमुखों को दो साल के अनिवार्य कार्यकाल के बाद तीन साल का सेवा विस्तार दिया जा सकता है।

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