क्राइम

दोनों बाजू टूटे, शरीर पर दांत के निशान, लोह से जलाने के… कौन थी बेबी फलक, जिस पर बेस्ड है दिल्ली क्राइम सीजन 3?

Delhi Crime Season 3: शेफाली शाह की वेब सीरीज दिल्ली क्राइम के सीजन 3 की हर तरफ चर्चा हो रही है. इस बार वो एक नए केस की इन्वेस्टिगेशन करने वाली हैं. ट्रेलर में सामने आया है कि इस सीरीज का सीजन-3 साल 2012 के कुख्यात ‘बेबी फलक’ केस पर आधारित है. इस केस ने साल 2012 में खूब चर्चाएं बटोरी थीं. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर दिल्ली का बहुचर्चित बेबी फलक केस क्या था?

Baby Falak Case 2012: शेफाली शाह की वेब सीरीज दिल्ली क्राइम के सीजन 3 की हर तरफ चर्चा हो रही है. इस बार वो एक नए केस की इन्वेस्टिगेशन करने वाली हैं. ट्रेलर में सामने आया है कि इस सीरीज का सीजन-3 साल 2012 के कुख्यात ‘बेबी फलक’ केस पर आधारित है. इस केस ने साल 2012 में खूब चर्चाएं बटोरी थीं. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर दिल्ली का बहुचर्चित बेबी फलक केस क्या था?

13 साल पहले, 18 जनवरी 2012 की शाम दो साल की मासूम बच्ची को एम्स ट्रॉमा सेंटर लहूलुहान हालत में लाया गया था. किसी को नहीं पता था कि वह बच्ची कौन है, कहां से आई है, या उसके साथ यह बर्बरता किसने की. बच्ची को देख डॉक्टरों सन्न रह गए, उस मासूम का सिर फट चुका था, दोनों बाजू टूटे हुए थे. पूरे शरीर पर इंसानी दांतों से काटने के निशान थे. उसके गालों पर गर्म लोहे से दागे जाने के निशान थे. डॉक्टरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया गया.
कौन थी फलक की मां?
जो लड़की बच्ची को लेकर वहां आई थी, वो अचानक गायब हो गई थी. बच्ची की पहचान और नाम अज्ञात था. जिसके बाद ICU में तैनात नर्सों ने ही उसे ‘फलक’ नाम दे दिया. धीरे-धीरे देशभर के लोगों का ध्यान उस बच्ची पर गया और हर कोई उसके ठीक होने की दुआ करने लगा. लेकिन अब सवाल ये था कि आखिर ये बच्ची कौन थी? और उसके साथ ये दरिंदगी किसने की थी?
जांच के बाद पुलिस ने 15 साल की उस लड़की को हिरासत में ले लिया था, जो बच्ची को अस्पताल लेकर आई थी. उसने कुछ भी नहीं बताया, जिसके बाद पुलिस ने उस लड़की को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के हवाले कर दिया और फिर बाद में उसे जुवेनाइल होम भेज दिया गया.
बेबी फलक की कहानी
अब दिल्ली पुलिस उस मासूम की असली मां की तलाश शुरू कर चुकी थी. 1 फरवरी 2012 को पता चला कि बच्ची की असली मां ‘मुन्नी’ है. 27 साल की मुन्नी बिहार की रहने वाली थी. जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि मुन्नी के तीन बच्चे थे. फलक, उसका पांच साल का भाई और तीन साल की बहन सनोबर. मुन्नी को दो महिलाएं शादी का वादा करके उसे बिहार से दिल्ली लाईं, फिर दूसरे विवाह के नाम पर उसे बेच दिया. बदले में उसके बच्चों को रखने का वादा किया. लेकिन उन दोनों महिलाओं ने उसके तीनों बच्चों को बेच दिया. फलक एक किशोरी के पास पहुंच गई, जो खुद 15 साल की नाबालिग लड़की थी और एक शादीशुदा आदमी के साथ रह रही थी. आसान शब्दों में कहा जाए मुन्नी की जिंदगी मानव तस्करों के झांसे में आ गई थी.
फलक की असली मां की गवाही
मुन्नी ने पुलिस को सारा सच बताया कि आखिर उसके साथ हुआ क्या था. कैसे लक्ष्मी नाम की महिला ने उसे दिल्ली लाने का लालच दिया. फिर लक्ष्मी और कांति चौधरी नामक महिलाओं ने उसे धोखे से दूसरी शादी के लिए राजस्थान भेज दिया. उन दोनों ने मुन्नी के बच्चों को दिल्ली में ही रखने का वादा किया था. लेकिन लक्ष्मी ने फलक को मनजोत नाम के आदमी को सौंप दिया.
राजकुमार एक आपराधिक हिस्ट्री वाला शख्स था. उसका असली नाम मोहम्मद दिलशाद बताया गया. उसने फलक को अपनी 15 साल की प्रेमिका को सौंप दिया था. जबकि वो नाबालिग लड़की खुद तस्करी की शिकार थी. उस नाबालिग लड़की के बारे में पता चला कि उसके पिता विजेंद्र ने उसे बेचा था. उसे खरीदने वाले संदीप और आरती ने उसे वेश्यावृत्ति में धकेल दिया. यही नहीं, राजकुमार ने भी जमकर उसका शोषण किया. अब मासूम फलक भी इसी चक्र में फंस गई थी.
इधर फलक जिंदगी और मौत से लड़ रही थी
आईसीयू में भर्ती होने के साथ ही फलक को ब्रेन सर्जरी की गई. दरअसल, उसके दिमाग में पानी जमा हो रहा था. यही वजह थी कि उसकी छह ब्रेन सर्जरी हुईं थी. पहली सर्जरी में खून का थक्का निकाला गया था. दूसरी सर्जरी में उसके दिमाग का पानी निकाला गया. वह मेनिन्जाइटिस की चपेट में आ गई थी. फेफड़ों, खून और दिमाग में संक्रमण फैल गया था. वो एक महीने से ज्यादा वक्त तक वेंटिलेटर पर रही. उसे सांस लेने में तकलीफ थी. 17 फरवरी 2012 को वो ब्रेन इंफेक्शन से उभर गई थी. लेकिन उसे दो हार्ट अटैक हो चुके थे, लेकिन वो जिंदा थी.
फरवरी के अंत तक फलक ठीक होने लगी. 2 मार्च को वेंटिलेटर हटा दिया गया और सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया. अब वह खुद सांस ले रही थी. नर्सों के साथ खेलने लगी, सबने उसे ‘मिरेकल बेबी’ कहना शुरू कर दिया. डॉक्टर डिस्चार्ज की तैयारी कर रहे थे. लेकिन दिल की धड़कनें अनियमित थीं. मीडिया में फलक छाई रही. अमेरिका-कनाडा से एडॉप्शन के ऑफर आए. लेकिन डॉक्टर जानते थे कि ब्रेन डैमेज हमेशा का हो सकता है. फिर भी उम्मीद बाकी थी.
नाबालिग का कबूलनामा
अब नाबालिग लड़की का कबूलनामा सामने आया, उसका नाम गुड़िया उर्फ लक्ष्मी था. पूछताछ में उसने बताया कि नवंबर 2011 में राजकुमार ने फलक उसके हवाले की. लेकिन वह अकेली बच्ची संभाल नहीं पाई. फलक रोती तो गुस्से में दीवार से सिर ठोक दिया. गर्म लोहे से गाल दागे, दांतों से काटा, 17 जनवरी की रात फलक रोती रही तो वह उसे निजी अस्पताल ले गई. वहां से एम्स रेफर किया गया. लक्ष्मी ने कहा कि वह खुद शोषित थी. पिता ने बेचा. संदीप ने तीन दिन बलात्कार किया. फिर वेश्यावृत्ति में डाला. राजकुमार ने भी शोषण किया.
फलक केस में 10 लोग पकड़े गए
पुलिस ने अब छापेमारी शुरू की. लक्ष्मी और कांति चौधरी को पहले गिरफ्तार किया गया, वे तस्करी की मुख्य आरोपी थीं. फिर संदीप-आरती पकड़े गए. किशोरी के पिता विजेंद्र भी. राजकुमार 13 मार्च को फरार हालत से गिरफ्तार. कुल 10 लोग पकड़े गए. फलक का भाई उत्तम नगर से मिला. बहन सनोबर बिहार में. डीसीपी छाया शर्मा ने कहा, यह किडनैपिंग और तस्करी का केस है. मुन्नी 15 फरवरी को फलक से मिली. रो-रोकर बुरा हाल था. उसे शेल्टर होम में रखा. इस जांच से बड़ा तस्करी नेटवर्क उजागर हुआ. लेकिन फलक की जिंदगी बचाने का वक्त निकल चुका था.
तीसरा हार्ट अटैक और फलक ने कहा ‘अलविदा’
मार्च 2012 तक फलक ठीक लग रही थी. लेकिन 15 मार्च रात 9:40 बजे तीसरा हार्ट अटैक आया, तब वह सो रही थी. ‘कार्डियक एरिद्मिया’ से दिल की धड़कन रुक गई. डॉक्टरों ने रिवाइव करने की कोशिश की, लेकिन 56 दिनों की जंग के बाद फलक चली गई. पोस्टमार्टम में हार्टबीट अनियमित की पुष्टि हुई. छह सर्जरी, दो हार्ट अटैक झेले, लेकिन तीसरा घातक साबित हुआ. जिसके बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई. 16 मार्च को फलक का अंतिम संस्कार फिरोजशाह कोटला कब्रिस्तान में हुआ. हजारों लोग आए. डॉक्टर भी शामिल.
गृह मंत्रालय ने इसे तस्करी केस घोषित किया. मुख्य आरोपी राजकुमार और लक्ष्मी को सजा मिली.

 

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