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शाब्दिक गिरावट वाला मोदीजी के शाशन में एक और चुनाव !

सुशासन, स्वच्छता और शुचिता के दावे करने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के पास शाब्दिक सभ्यता का घोर अभाव दिख रहा है

सुशासन, स्वच्छता और शुचिता के दावे करने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के पास शाब्दिक सभ्यता का घोर अभाव दिख रहा है। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे नरेन्द्र मोदी चुनाव आते ही सारे चोले उतारकर केवल भाजपा के स्टार प्रचारक बन जाते हैं और फिर चुनाव जीतने के लिए भाषा का स्तर चाहे जितना गिराना हो, उस स्तर पर उतरने में जरा भी नहीं झिझकते। उन्हें इस बात की परवाह नहीं होती कि भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी बातें, उनके विचार, उनकी भाषा दुनिया के दूसरे कोनों में पहुंचती होगी, तो उनकी कैसी छवि बनती होगी। श्री मोदी को केवल सत्ता में आने और उसे बचाए रखने की परवाह है, उसी के लिए वे अपने विरोधियों पर कीचड़ उछालते रहते हैं। जैसे बिहार की अपनी एक सभा में उन्होंने कहा कि बहनों-बेटियों को उठाने का खेल चल रहा है। इससे पहले झारखंड चुनाव में उन्होंने कहा था कि ये आपकी बेटी भी छीन रहे हैं और आपकी माटी भी हड़प रहे हैं। बेशक मोदीजी लड़कियों की सुरक्षा के लिए फिक्रमंद होंगे, लेकिन ये सरोकार उनकी भाषा में कतई नहीं झलक रहा। लड़कियों को उठा लेना, जैसे निम्नस्तरीय फिकरे किस किस्म के लोग कसते हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है।

केंद्र की 11 साल की सत्ता में रहकर, तमाम केन्द्रीय एजेंसियों का काम करीब से देखकर नरेन्द्र मोदी के पास कांग्रेस पर हमला करने के लिए मुद्दों की कमी नहीं होगी। पिछली सरकारों की गलतियों की सतर्क व्याख्या करके नरेन्द्र मोदी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को घेर सकते हैं, लेकिन वे इस सघन परिश्रम से बचने के लिए सीधे उन जुमलों पर उतर आते हैं, जिन पर जनता का ध्यान एकदम से चला जाता है। जैसे लोकसभा चुनावों में श्री मोदी ने मंगलसूत्र चुराने की बात कही थी। सावन में मछली-मटन खाने को मुद्दा बनाया था। झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम पर सीधे चारित्रिक लांछन पर उतर आए कि बेटियों को छीन रहे हैं। अब बिहार में आरजेडी और कांग्रेस को घेरने के लिए नरेन्द्र मोदी इसी पैंतरे को आजमा रहे हैं। आरजेडी के लिए श्री मोदी ने कहा कि कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुशासन, करप्शन बिहार में राजद के ‘जंगलराज’ की पहचान है। हालांकि 2005 के बाद से आरजेडी सत्ता में नहीं आई है, महज 17 महीनों के लिए सत्ता में रही तो वह भी जेडीयू के साथ मिलकर। इसलिए बिहार के समाज में क्रूरता, कटुता, कुशासन मोदीजी को नजर आ रहा है, तो इसके लिए उनकी अपनी पार्टी भाजपा और जेडीयू जिम्मेदार माने जाएंगे, जो लगातार सत्ता पर बने हुए हैं। अगर एनडीए सरकार के होने के बावजूद कट्टे का डर श्री मोदी दिखा रहे हैं या करप्शन की बात कर रहे हैं, तो असल में वो खुद पर ही उंगली उठा रहे हैं।

बहरहाल, चुनावों में इस तरह की जुमलेबाजी सुनने की जनता अभ्यस्त हो चुकी है। इसलिए प्रधानमंत्री की भाषा का गिरता स्तर अब चर्चा का विषय नहीं बनता है। जबकि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह अच्छी बात नहीं है। वैसे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी अब पूरी आक्रामकता के साथ नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार पर हमले बोल रहे हैं। और इसमें उनकी भाषा भी कई जगह खराब नजर आई। राहुल गांधी की भाषा में अशिष्टता दिखी, गनीमत है कि अभ्रदता इससे दूर रही। मुजफ्फरपुर में बुधवार को राहुल गांधी ने कहा कि वोट पाने के लिए मोदीजी कुछ भी करने को तैयार रहेंगे, जनता उन्हें नाचने कहेगी, तो वे नाच भी लेंगे। राहुल गांधी ने यह तंज छठ पूजा को लेकर किया, जिसमें नरेन्द्र मोदी के अघ्र्य देने के लिए यमुना नदी से अलग एक घाट में पाइप से पानी लाकर इंतजाम किया गया था। हालांकि आखिरी वक्त में नरेन्द्र मोदी ने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। शायद उन्हें अंदाज हो गया था कि जनता के लिए गंदा पानी और खुद के लिए साफ पानी की खबर लोगों के बीच और फैलेगी तो इससे नुकसान होगा। वैसे भी नरेन्द्र मोदी ने कभी छठ पूजा नहीं की, क्योंकि वे गुजरात से हैं। छठ का व्रत पूर्वांचल के लोग करते हैं। बिहार चुनाव के मद्देनजर मोदीजी छठ पूजा करने जा रहे थे, इसी पर राहुल गांधी ने उन्हें घेरा। याद करें कि इससे पहले पितृपक्ष में गयाजी में अपनी मां का पिंडदान करने की तैयारी भी नरेन्द्र मोदी की थी, लेकिन तब भी खबरें सामने आईं कि उनकी मां का पिंडदान उनके भाई वाराणसी में पहले ही कर चुके हैं, केवल चुनावी फायदे के लिए मोदीजी अपनी मृत मां के नाम को भुना रहे थे। इससे पहले अपनी मां को कहे अपशब्द को भी नरेन्द्र मोदी ने फौरन छठी मईया से जोड़ लिया था। जनता इन सारे पैंतरों को देख रही है और इसमें इस बार नहीं फंस रही है, यह बात नरेन्द्र मोदी ने समझी तो इनसे दूरी बनाने लगे। हालांकि राहुल गांधी के आरोपों के बाद अब फिर से श्री मोदी इस बात को छठी मईया तक ले जा रहे हैं।

राहुल गांधी ने साफ कहा कि मोदी छठ पूजा का नाटक कर रहे थे, जबकि श्री मोदी समेत तमाम भाजपा नेता इसे छठी मईया का अपमान बताने लगे हैं। राहुल गांधी ने मुद्दा गलत नहीं उठाया, बल्कि उनका लहजा गलत था। लेकिन भाजपा ने लहजे पर जवाब देने की जगह फिर से नेहरू-गांधी परिवार पर निजी हमले शुरु कर दिए। नरेन्द्र मोदी राहुल गांधी को देश के सबसे भ्रष्ट परिवार का युवराज बता रहे हैं। गिरिराज सिंह उन्हें नाचने वाले खानदान का बता रहे हैं और पूछ रहे हैं कि उनका धर्म क्या है। रेखा गुप्ता इसे मानसिक दिवालियापन कह रही हैं। इन हमलों को देखकर लगा मानो समूची भाजपा इंतजार में थी कि कब राहुल गांधी बिहार आएं और भाजपा को आक्रामक होने के लिए मुद्दे मिलें। वर्ना बिहार में भाजपा एनडीए सरकार के काम के नाम पर वोट नहीं मांग पा रही हैं। अभी जितने भी वादे वो कर रही है, उस पर जनता सवाल कर रही है कि जो काम 10-20 साल में नहीं किया, वो अगले पांच साल में करने की क्या गारंटी है। इन सवालों से बचने के लिए शाब्दिक गिरावट की ढाल ही भाजपा के पास बची है।

 

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