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देश के बाहर विदेशी मंच से मोदीजी का राजनैतिकहिसाब-किताब ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन दिन की आधिकारिक विदेश यात्रा पर हैं

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन दिन की आधिकारिक विदेश यात्रा पर हैं। जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क तीन देशों की यात्रा का मकसद यूरोपीय साझेदारों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। उनकी यात्रा कितनी फलदायी रहती है, ये तो आने वाले वक्त में पता लगेगा। लेकिन इतना तो तय है कि राजनीतिक हिसाब-किताब के लिए विदेशी मंच का इस्तेमाल करने से देश को कोई लाभ नहीं होने वाला, उल्टे इससे छवि खराब होगी।

अपनी यात्रा के पहले पड़ाव में जर्मनी के बर्लिन में भारतीय प्रवासियों को प्रधानमंत्री ने संबोधित किया। अपने संबोधन की शुरुआत ही उन्होंने यह कहते हुए की कि वह जर्मन राजधानी में न तो अपने बारे में बात करने के लिए हैं और न ही मोदी सरकार के बारे में बात करने के लिए। लेकिन इसके बाद मोदीजी ने जो कुछ कहा उसमें फिर चुनावी रैलियों जैसा ही अहसास हुआ।

जैसे उन्होंने करोड़ों भारतीयों की क्षमता की बात की। कहा कि सुधार के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। आज भारत जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा की गुणवत्ता और अन्य सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। देश, नौकरशाही, सरकारी कार्यालय समान हैं, अब हमें बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। नामालूम किन आंकड़ों के जरिए प्रधानमंत्री विदेशी जमीन से देश में सब कुछ अच्छा होने का दावा करते हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आकलन, विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति के आंकड़े निराशाजनक ही हैं।

पोषण, स्वास्थ्य, लोकतंत्र, शिक्षा, ईमानदार ऐसे कई मानकों में भारत की रैंकिंग गिरती जा रही है। पिछले कुछ अरसे से आर्थिक मोर्चे पर भी भारत की साख गिरी है। सरकार अपनी इन कमजोरियों को स्वीकार नहीं करती है। बल्कि कई बार तो इसे देश के खिलाफ षड्यंत्र की करार दे देती है। विदेशी एजेंसियों पर इस तरह की साजिश रचने के आरोप लगाए जा सकते हैं, लेकिन देश के भीतर जो हालात हैं, क्या उनसे भी सरकार ने मुंह मोड़ लिया है।

प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि भारत की जनता ने एक बटन दबाकर पिछले तीन दशकों के राजनीतिक रूप से अस्थिर माहौल को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि जब देश संकल्प लेता है, तब वह नये रास्तों पर चलता है और इच्छित लक्ष्यों को प्राप्त करके दिखाता है। मोदीजी का कहना है कि नया भारत अब एक सुरक्षित भविष्य के बारे में नहीं सोचता है, बल्कि जोखिम लेने के लिए तैयार है, नया करने और विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ”भारत में 2014 के आसपास 200-400 स्टार्ट-अप थे, आज 68,000 स्टार्ट अप और दर्जनों यूनिकॉर्न हैं। इसी तरह की आत्ममुग्धता में पगी हुई और भी बातें उन्होंने कहीं। यह सही है कि भारत ने 2014 और फिर 2019 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। नरेन्द्र मोदी के चेहरे और नेतृत्व पर भरोसा दिखाया। उन्होंने अच्छे दिनों का वादा जनता से किया था। मगर अब वे कह रहे हैं कि नया भारत एक सुरक्षित भविष्य के बारे में नहीं सोचता, जोखिम लेने तैयार है। तो क्या अब बेरोजगारी के बढ़ते आंकड़ों पर देश को परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारे युवाओं को सुरक्षित भविष्य नहीं चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल भुगतान तंत्र की सफलता के लिए भी खुद की पीठ थपथपाई। और इस दौरान कहा कि अब किसी प्रधानमंत्री को ये कहना नहीं पड़ेगा कि मैं दिल्ली से एक रुपया भेजता हूं और 15 पैसे पहुंचते हैं। वो कौन सा पंजा था, जो 85 पैसा घिस लेता था। मोदीजी ने सीधे तौर पर कांग्रेस का नाम नहीं लिया, लेकिन यह सब जानते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि सरकार के एक रुपये में से 15 पैसे लोगों तक पहुंचते हैं। कांग्रेस विरोधी नेता इस बयान को अक्सर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। मगर उनका ध्यान शायद इस बात पर नहीं जाता कि राजीव गांधी ने कम से कम देश में पनप रही भ्रष्टाचार की संस्कृति पर बोलने की हिम्मत दिखाई थी। और जिस डिजिटल प्रगति को आज सरकार अपने खाते में जोड़ती है, उसकी नींव भी राजीव गांधी ने ही रखी थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने केवल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस पर कटाक्ष नहीं किया, बल्कि सीधे तौर पर जिक्र किए बिना जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की भी बात की। ये बात करते हुए भी उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले देश तो एक था, लेकिन संविधान दो थे। आखिर देश को एक होने में इतना लंबा समय क्यों लगा? सात दशक बीत चुके हैं, इतने समय में कोई भी देश एक संविधान लागू कर देता। लेकिन अब हमने ऐसा कर दिया है।

यह नजर आ रहा है कि आठ सालों की सत्ता के बाद भी प्रधानमंत्री अपने लिए अच्छे अंक हासिल करने के लिए खुद के कामों की जगह कांग्रेस को गलत बताने में लगे हुए हैं। लेकिन राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता देश की हदों में ही रहे, तो अच्छा है।

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