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मंत्रिपरिषद में मोदीजी द्वारा बदलाव से देश की सूरत बदल पाएगी, क्या जनता के बुरे दिन अच्छे दिनों में तब्दील हो पाएंगे ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर अपनी कही बातों के विपरीत जाते हुए बड़ा कदम उठाया है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर अपनी कही बातों के विपरीत जाते हुए बड़ा कदम उठाया है। जब देश के प्रधानमंत्री का जिम्मा उन्होंने संभाला था, तो ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ की घोषणा की थी। लेकिन अब उन्होंने अपनी इस घोषणा को नजरंदाज करते हुए मंत्रिपरिषद का विस्तार किया है, जिसमें 30 कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री और कुल 45 राज्यमंत्री बनाए गए हैं। इस तरह कुल मंत्रियों की संख्या प्रधानमंत्री समेत 78 हो गई है। 2019 में कुल 21 कैबिनेट मंत्री थे जो अब 30 हो गए हैं, 23 राज्यमंत्रियों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है, हालांकि स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों की संख्या 9 से घटकर 2 हो गई है। इस विस्तार में 36 नए चेहरों को जगह दी गई है, हालांकि 12 मंत्रियों के इस्तीफे भी हुए हैं। जिनमें कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, और  शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक जैसे हाईप्रोफाइल चेहरे शामिल हैं।

अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्रिपरिषद के पहले और संभवत: आखिरी विस्तार से पहले प्रधानमंत्री मोदी के सामने कई तरह की उलझनें और चुनौतियां देखने मिलीं। देश पिछले दो साल से कोरोना की चपेट में है और आम जनता सरकार से लगातार राहत की मांग कर रही है। हालांकि जनता की मुश्किलें कम होने की जगह बढ़ती गई हैं। स्वास्थ्य समस्याओं के साथ-साथ आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक मोर्चों पर सरकार की नीतियों के कारण लोगों को तकलीफ हो रही है। मंत्रिपरिषद में फेरबदल कर मोदीजी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे जनता की तकलीफ को समझते हैं। इसलिए उन मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया, जिनके कामकाज से वे खुश नहीं थे। जैसे स्वास्थ्य मंत्रालय डॉ. हर्षवर्धन से लेकर मनसुख मंडाविया को दे दिया गया। कोरोना काल में बोर्ड समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में चल रही अनिश्चितता के कारण छात्र कई बार नाराज हुए। अब मोदीजी ने रमेश पोखरियाल निशंक से शिक्षा मंत्रालय लेकर धर्मेंद्र प्रधान को दे दिया है।

श्री प्रधान अब तक पेट्रोलियम मंत्रालय संभाल रहे थे। तेल की बढ़ती कीमतें भी जनता के लिए बड़ा बोझ हैं। मोदीजी ने पेट्रोलियम मंत्रालय धर्मेंद्र प्रधान से लेकर हरदीप सिंह पुरी को दे दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि हरदीप सिंह पुरी किस तरह तेल के सौदे में अपने विदेश सेवा के दिनों के अनुभवों का लाभ देश को दे पाते हैं। वैसे अगर केवल विफलता के पैमाने पर मंत्रालय बदलना था तो निर्मला सीतारमण को क्यों नहीं हटाया गया, क्या इसलिए कि आर्थिक फैसलों में वे केवल जी मंत्री जी कहने की अधिकारी हैं।

मोदी सरकार की इस नई टीम में श्रम मंत्रालय के जिम्मे को भी बदल दिया गया है। कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों की बदहाली दुनिया ने देखी है और ये भी देखा है कि सरकार मजदूरों को राहत देने तब आगे आई, जब पानी सिर के ऊपर से निकल चुका था। बहरहाल, श्रम मंत्रालय से संतोष गंगवार को हटा दिया गया है और अब भूपेंद्र यादव को श्रम-रोज़गार मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। रेल मंत्रालय से भी पीयूष गोयल को हटाकर अश्विनी वैष्णव को यह महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया है। महज दो साल पहले भाजपा के कोटे से राज्यसभा सांसद बने ओडिशा कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी वैष्णव को रेल मंत्रालय सौंप कर मोदीजी ने बहुतों को आश्चर्य में डाल दिया है। हालांकि जोधपुर के रहने वाले अश्विनी वैष्णव की मोदीजी से नजदीकियां वाजपेयी सरकार के वक्त से हैं। भाजपा और बीजू जनता दल का जब गठबंधन था, तो इसमें वैष्णव अहम कड़ी थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंत्रिपरिषद विस्तार में चुनावी और जातिगत सभी तरह के समीकरणों को साधने की कोशिश की है। मंत्रिपरिषद में 20 अजा-जजा, 27 ओबीसी और पांच अल्पसंख्यक मंत्रियों को शामिल किया गया है। मंत्रिपरिषद में कुल 11 महिलाएं हैं और खास बात ये कि यह मंत्रिपरिषद अब तक की तमाम केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मुक़ाबले औसत आयु में सबसे युवा हैं। मंत्रिपरिषद फेरबदल आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। खासतौर पर उत्तरप्रदेश और गुजरात पर मोदीजी की कृपादृष्टि भरपूर बरसी है। इस विस्तार में उप्र से 7 मंत्रियों को शामिल किया गया है। पूर्वांचल से पंकज चौधरी और अनुप्रिया पटेल, अवध से कौशल किशोर और अजय मिश्रा,  भानुप्रताप वर्मा बुंदेलखंड  से, बीएल वर्मा रोहिलखंड से और एसपी सिंह बघेल को पश्चिम उत्तर प्रदेश से मंत्री बनाकर मोदीजी ने क्षेत्रीय संतुलन भी साध लिया है। वहीं गुजरात से पुरुषोत्तम रुपाला और मनसुख मांडवीया को पदोन्नत करके कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इनके साथ दर्शन जारदोष,  मुंजपारा महेंद्र भाई और देव सिंह चौहान को भी मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है। आदिवासी नेता मंगत भाई पटेल को मध्यप्रदेश का राज्यपाल पहले ही बना दिया गया है। अमित शाह और एस जयशंकर पहले से ही केबिनेट मंत्री हैं, इस तरह गुजरात से कुल सात सांसद मंत्रिपरिषद के सदस्य हैं।

लंबे इंतजार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्रालय मिल गया है। चिराग पासवान के रूठने और धमकी देने के बावजूद पशुपति पारस को मंत्री बनाया गया है। जदयू से भी एक मंत्री बनाकर मोदीजी ने बता दिया कि उन्हें नीतीश कुमार की नाराजगी की परवाह नहीं। मंत्रिपरिषद में अपेक्षित बदलाव तो मोदीजी ने कर दिया, लेकिन क्या इससे देश की सूरत बदल पाएगी, क्या जनता के बुरे दिन अच्छे दिनों में तब्दील हो पाएंगे, इस वक्त यही सवाल जनता के सामने है।

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