धर्म

सावन प्रदोष व्रत=सर्वार्थ सिद्धि समेत 3 शुभ योग में सावन का दूसरा प्रदोष, राशि अनुसार करें शिव पूजा, पूरी होगी इच्छा

सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 30 जुलाई रविवार को है. सावन का दूसरा प्रदोष व्रत रविवार को है, इसलिए यह रवि प्रदोष व्रत है. सावन के दूसरे प्रदोष व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और इंद्र योग बन रहे हैं. जानते हैं प्रदोष व्रत के दिन बनने वाले शुभ योग और राशि अनुसार शिव पूजा के बारे में.

सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 30 जुलाई रविवार को है. इस साल श्रावण माह में अधिक मास लगे होने के कारण सावन माह 59 दिनों का है. सावन में 4 प्रदोष व्रत हैं. सावन का दूसरा प्रदोष व्रत रविवार को है, इसलिए यह रवि प्रदोष व्रत है. सावन के दूसरे प्रदोष व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और इंद्र योग बन रहे हैं. इन 3 शुभ योगों के कारण यह दिन और भी फलदायी है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल होते हैं. प्रदोष व्रत के दिन आप अपनी राशि अनुसार शिव जी की पूजा करें. महादेव की कृपा से जल्दी ही आपकी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं प्रदोष व्रत के दिन बनने वाले शुभ योग और राशि अनुसार शिव पूजा के बारे में.

 

3 शुभ योग में सावन का दूसरा प्रदोष 2023
सर्वार्थ सिद्धि योग: 30 जुलाई, सुबह 05 बजकर 41 मिनट से रात 09 बजकर 32 मिनट तक
इंद्र योग: प्रात:काल से लेकर सुबह 06 बजकर 34 मिनट तक
रवि योग: रात 09 बजकर 32 मिनट से अगले दिन सुबह 05 बजकर 42 मिनट तक
श्रावण अधिक मास शुक्ल त्रयोदशी तिथि: 30 जुलाई, रविवार, सुबह 10 बजकर 34 मिनट से लेकर 31 जुलाई सोमवार को सुबह 07 बजकर 26 मिनट तक.
प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त: शाम 07 बजकर 14 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 19 मिनट तक

रवि प्रदोष से पाएं आरोग्य का वरदान
सावन का दूसरा प्रदोष रवि प्रदोष व्रत है. रवि प्रदोष व्रत और शिव पूजा करने से सेहत ठीक होती है. लोग निरोगी रहते हैं. शिव कृपा से आरोग्य का वरदान मिलता है.

सावन प्रदोष 2023 राशि अनुसार शिव पूजा
मेष: ओम नम: शिवाय मंत्र उच्चारण के साथ शिवजी को लाल फूल, लाल चंदन और बेलपत्र चढ़ाएं.

वृष: ओम नम: शिवाय मंत्र जाप करते हुए भगवान भोलेनाथ को गंगाजल, गाय का दूध, सफेद फूल, दही आदि अर्पित करें.

मिथुन: ओम नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ओम नम: मंत्र को पढ़ते हुए शिवजी को गन्ने का रस, दूब, भांग, धतूरा, मूंग, दही आदि चढ़ाएं.

कर्क: ओम चंद्रमौलेश्वर नम: मंत्रोच्चार के साथ भगवान चंद्रशेखर की पूजा गाय के दूध, सफेद फूल, चंदन, बेलपत्र, भांग आदि से करें.

सिंह: ओम नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ओम नम: मंत्र को पढ़ते हुए भगवान शंकर को लाल फूल, आक का फूल, गेहूं, गुड़​ मिला जल अर्पित करें.

कन्या: ओम नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ओम नम: मंत्र से आपका कल्याण होगा. आप शिवजी को गंगाजल, बेलपत्र, पान, भांग, धतूरा, गन्ने का रस आदि अर्पित करें.

तुला: ओम नम: शिवाय को मन में दोहराते हुए भगवान शंकर को दही, शहद, सफेद चंदन, श्रीखंड, गंगाजल आदि चढ़ाएं.

वृश्चिक: आप भगवान महादेव को पंचामृत, लाल फूल, बेलपत्र, लाल गुलाब आदि चढ़ाएं और ओम हौम ओम जूं स: मंत्र का जाप करें.

धनु: ओम नमो शिवाय गुरु देवाय नम: मंत्र का जाप करके भगवान भोलेनाथ को पीले फूल, पीला चंदन, बेलपत्र, मिश्री, गाय के दूध में मिश्री डालकर अर्पित करें.

मकर और कुंभ: ओम हौम ओम जूं स: मंत्र आपके लिए उपयोगी है. आप शिवलिंग पर नीले फूल, शमी पत्ता, बेलपत्र, भांग, उड़द की मिठाई आदि अर्पित करें.

मीन: ओम नमो शिवाय गुरु देवाय नम: मंत्र आपके लिए अच्छा है. आप शिव पूजा के लिए दूध, केसर, पीले फूल, नागकेसर, दही और चावल का उपयोग करें.

 

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