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देश में आज राजनैतिक बेईमानी पर तंज कसना घातक ! बेखौफ होने का इंतजार ?

कोई आपकी नीतियों की आलोचना करे, तो इसका बिल्कुल भी ये मतलब नहीं होता कि वो ‘एंटी नेशनल’ है

कोई आपकी नीतियों की आलोचना करे, तो इसका बिल्कुल भी ये मतलब नहीं होता कि वो ‘एंटी नेशनल’ है, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र में आलोचना के अधिकार को लेकर ये महत्वपूर्ण टिप्पणी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने की थी। लेकिन ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र सरकार तक इस टिप्पणी से निकला संदेश पहुंचा नहीं है या फिर सरकार ने इसे अनसुना कर दिया है।

क्योंकि महाराष्ट्र की शिंदे गुट वाली शिवसेना और भाजपा की गठबंधन सरकार ने दो युवा गायकों पर उनके गीतों के कारण मामला दर्ज किया है। ये दोनों युवक अलग-अलग पृष्ठभूमि के हैं, दोनों ने गीत भी अलग-अलग समस्याओं को लेकर अलग ढंग से लिखे। लेकिन दोनों के गीतों को सोशल मीडिया पर खूब देखा और सराहा गया। इसका सीधा मतलब यही है कि जनता भी उनके गीतों और गीतों में व्यक्त भावनाओं से इत्तेफाक रखती है। लेकिन महाराष्ट्र सरकार को ये गीत नागवार गुजरे और इसलिए अब इन युवा कलाकारों पर कानून का डंडा चलाया गया है।

औरंगाबाद के रैपर राज मुंगासे का मराठी भाषा में रैप गीत आया, जिसका शीर्षक है चोर और इसके शुरुआती बोल हैं ‘चोर आले 50 खोखे घेऊं किती बाघा, चोर आले’ एकदम ओके हूं’, जिसका हिंदी अनुवाद है कि ‘देखो, चोर 50 करोड़ रुपये के साथ आ गए हैं। देखो, चोर बिल्कुल ठीक दिखते हैं।’ इस गीत में श्री मुंगासे ने किसी राजनैतिक दल, किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन एकनाथ शिंदे सरकार ने इसे आपत्तिजनक पाया। गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे और उनके साथ गए विधायकों पर दल बदलने और उद्धव ठाकरे सरकार को गिराने के एवज में मोटी रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। इस राजनीतिक तख्तापलट के बाद श्री शिंदे मुख्यमंत्री बने थे। राज मुंगासे के गीत को शिंदे सरकार ने अपने ऊपर ले लिया और शिंदे गुट के एक कार्यकर्ता ने राज मुंगासे पर प्राथमिकी दर्ज कराई। राज मुंगासे पर धारा 501 (मानहानि), 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान) और 505 (2) (वर्गों के बीच दुश्मनी पैदा करने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि राज मुंगासे दलित समुदाय से आते हैं, अम्बेडकरवादी आंदोलनों में वे भाग लेते रहे हैं और हाल ही में उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया है।

महाराष्ट्र सरकार के निशाने पर आने वाले दूसरे रैपर हैं उमेश खाडे, जो खाडे शंभो के नाम से मशहूर हैं। उनके गीत ‘जनता भोंगली केली’ यानी आपने जनता को नंगा कर दिया, में भी किसी राजनैतिक दल का जिक्र नहीं है, बल्कि गीत में इस ओर ध्यान दिलाया गया है कि कैसे गरीब और हाशिये पर पड़े लोगों को जीवनयापन के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है, जबकि राजनीतिक दल बड़ी-बड़ी सौदेबाजी में व्यस्त हैं। इस गीत पर मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट ने शिकायत दर्ज की। उन पर आईपीसी की धारा 504, 505 (2) और आईटी अधिनियम 2000 की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। वैसे महाराष्ट्र में भोंगली एक आम ग्रामीण शब्द है, जिसका इस्तेमाल नग्नता के संदर्भ में किया जाता है और खाडे शंभो ने राज्य पर अपने नागरिकों की परवाह नहीं करने के लिए तीखे लहजे में इस शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने विपक्ष के नेताओं पर भी अपने गीत में निशाना साधा है।

दो रैपरों को उनके मन के गीत लिखने और सुनाने पर कानूनी कार्रवाई का सामना महाराष्ट्र में करना पड़ा है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, सत्ता के कोपभाजन पहले भी बहुत से लोग केवल इसलिए बने हैं, क्योंकि उन्होंने सत्ता की आलोचना करने या नेता का मखौल उड़ाने की हिम्मत दिखाई। प.बंगाल में जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा को 11 साल पहले ऐसी ही कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था, क्योंकि उन्होंने ममता बनर्जी पर बने एक कार्टून को आगे बढ़ाया था। अंबिकेश महापात्रा को 2012 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें बाद में जमानत मिल गई और अभी इस साल जनवरी में वे पूरी तरह दोषमुक्त करार दिए गए। प्रो. महापात्रा ने आरोप मुक्त होने पर कहा था कि कानूनी लड़ाई के अंत के बाद उन्हें अच्छा लगा, लेकिन वे उस दिन का इंतजार करेंगे जब लोग ऐसे झूठे मामलों के खिलाफ उठेंगे और इस युग से झूठे मामलों का अंत होगा। प्रो.महापात्रा ही नहीं, देश के तमाम नागरिकों को ऐसे दिन का इंतजार है, जब वे बेखौफ अपने देश में रह सकें और गलत को गलत, सही को सही कहने की आजादी महसूस कर सकें।

सत्ता पर बैठे लोगों पर कोई कार्टून बना दे, तंज कस दे या उनकी कमियों की ओर इशारा कर दे, उन्हें उनके कर्तव्यों की याद दिला दे, ये बता दे कि सत्ता पर वे सुख भोगने के लिए जनता की सेवा के लिए बैठे हैं, तो इन सबसे माननीयों की भावनाओं को ठेस पहुंच जाती है। लेकिन कुछ लोग जो सरेआम देश के संविधान को धता बताकर वैमनस्य फैलाने का काम करते रहते हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती। बल्कि कई बार तो सत्ता उन्हें संरक्षण देती है, जिससे विभाजनकारी ताकतों की हिम्मत और बढ़ जाती है। जैसे इस रविवार को ही पूर्वोत्तर दिल्ली के करावल नगर में आयोजित एक ‘हिंदू राष्ट्र पंचायत’ में यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के सदस्यों ने ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने और ‘लव जिहाद’ को लेकर कार्रवाई करने का आह्वान किया।

भाजपा नेता और यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने कहा, ‘2025 में आरएसएस के 100 साल पूरे होने से पहले उसका लक्ष्य देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना पूरा करना है। हम सबसे पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली को एक हिंदू राष्ट्र जिला बनाएंगे और फिर पूरे देश को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे। इस कार्यक्रम में कई भाजपा नेता भी शामिल थे। कार्यक्रम में नफरती भाषण दिए गए, लेकिन उस पर पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है, अभी कुछ पता नहीं। अलबत्ता पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया कि कार्यक्रम के लिए पुलिस से अनुमति नहीं ली थी।

सरेआम देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का ऐलान करना देश के लिए खतरनाक है या फिर गरीबी के लिए आवाज उठाना और राजनैतिक बेईमानी पर तंज कसना घातक है, इस सवाल पर समाज को मंथन करना चाहिए, और अपना जवाब सरकार तक पहुंचाना चाहिए।

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